हाथरस कांड : आइए जाने 14 सितंबर, 2020 के बाद का

उत्तर प्रदेश के हाथरस कांड की खबर पूरे देश में फैली हुई है। इस मामले को लेकर यूपी से दिल्ली तक सियासी घमासान चल रहा है। विपक्ष राज्य सरकार को हर तरफ से घेरने की कोशिश की जा रही है। परंतु सीएम योगी आदित्य नाथ भी जवाब देने में देरी नहीं कर करते है। वह दोषियों को दंड देने में चूकते नहीं है। सुबह नौ बजकर 30 मिनट पर पीड़िता और उसकी मां एक दूसरे से करीब 100 मीटर की दूरी पर खेत में काम कर रही थीं। वह खेत उच्च जाति के किसानों का है। पीड़िता और उसकी मां अक्सर वहां अपने जानवरों के लिए घास काटने जाती थी। पीड़िता की मां का कहना है कि जब  उसने अचानक अपनी बेटी की चीख पुकार सुनी ओर वो उसकी तरफ दौड़ पड़ी। मां ने अपने बेटे को फोन किया। बेटा कुछ देर बाद अपनी बाइक पर सवार होकर घटनास्थल पर पहुंचा। उसके बाद दोनों पीड़ित लड़की को स्थानीय पुलिस चौकी पर ले गए। उस समय पुलिस चौकी पर तैनात पुलिसकर्मियों ने बयान और शिकायत दर्ज करने के बाद एफआईआर दर्ज कर ली। 

पीड़िता की हाल खराब देखकर पुलिस करीब 11 बजकर 45 मिनट पर अपनी जीप से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले गई। समय 12.10-12.30 के बीच प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर ने कहा कि पीड़िता गंभीर है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र क्लिनिक में उसके इलाज की कोई सुविधा नहीं है। इसके बाद उसे एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में रेफर कर दिया गया। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र क्लिनिक की एम्बुलेंस पीड़िता को अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कॉलेज ले गई। पीएमयू में शाम 4 बजकर 10 मिनट पर उसे एडमिट किया जाता है। 

19 सितंबर 2020 को, लड़की का ऐसा हाल किसने किया, पुलिस इस सवाल का जवाब तलाश रही थी। तभी पुलिस को पीड़िता के पड़ोस में रहने वाले एक लड़के की सूचना मिली कि वो कहीं गायब है। पुलिस शक के आधार पर उसकी तलाश में जुट गई। और पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली और इस घृणित कांड को अंजाम देने वाले आरोपी ठाकुर संदीप सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया। 

22 सितंबर 2020 को, घटना के बाद आठ दिन यानी 22 सितंबर तक पीड़ित बेहोश रही। लड़की होश में आई तो उसने आपबीती सुनाई। तीन अन्य आरोपियों के नाम भी पुलिस को बताए। पुलिस हरकत में आई और पीड़ित परिवार की तहरीर पर बलात्कार की धारा भी एफआईआर में जोड़ दी गई। आरोपियों की तलाश शुरू कर दी गई।

23 सितंबर 2020 को, पीड़िता ने अपने बयान में आरोपियों के बारे में बता दिया था। सभी आरोपी पीड़िता के ही गांव के थे। लिहाजा पुलिस ने उनके ठिकानों पर दबिश देना शुरू कर दिया। इसी दौरान पुलिस ने दबिश देकर लवकुश पुत्र रामवीर सिंह को गिरफ्तार कर लिया।

24 सितंबर 2020 को, पुलिस ने संदीप और लवकुश को गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन अभी दो आरोपी फरार थे. लिहाजा उनकी तलाश में लगातार दबिश दी जा रही थी. उधर, सूबे की राजनीति भी इस मामले पर गर्मा चुकी थी. विपक्ष के तेवर तीखे हो रहे थे.

25 सितंबर 2020 को, पुलिस अपने मुखबिर तंत्र के सहारे आरोपियों की तलाश में जुटी थी। इसी बीच पुलिस को एक आरोपी का सुराग लगा। पुलिस ने फौरन बताए गए स्थान पर दबिश दी और एक और आरोपी रवि सिंह पुत्र अतर सिंह को धर दबोचा. लेकिन अभी भी एक आरोपी खुला घूम रहा था। पुलिस उसके पीछे थी।

26 सितंबर 2020 को, पुलिस शिद्दत से चौथे आरोपी की तलाश कर रही थी, जो पुलिस से भाग रहा था. वो आगे था और पुलिस पीछे. लगातार उसके सुराग जुटाए जा रहे थे। इसी दौरान एक गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने एक जगह छापेमारी की और चौथा आरोपी रामकुमार उर्फ रामू पुत्र राकेश सिंह पुलिस के हत्थे चढ़ गया।

27 सितंबर 2020 को, अलीगढ़ मेडिकल अस्पताल में पीड़ित लड़की की हालत बिगड़ती जा रही थी। वहां के डॉक्टर उसे संभाल नहीं पा रहे थे। डॉक्टरों ने उसकी हालत देखने के बाद उसे रेफर करने का फैसला लिया। 

पीड़िता और परिवार के बयान

  • 14 सितंबर को लड़की के भाई ने अपने बयान में संदीप को हमलावर के रूप में बताया और कहा लड़की बेहोश है।
  • 19 सितंबर को पीड़ित लड़की ने अपना पहला बयान दिया। पीड़िता ने आरोपी संदीप सहित दो हमलावरों के नाम बताए। बलात्कार के प्रयास की बात कही। लेकिन बलात्कार की नहीं।
  • 22 सितंबर को लड़की ने अपना दूसरा बयान दिया। सभी चार आरोपी लड़कों के नाम की पुष्टि की। पीड़िता ने बयान में बताया कि उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया था। पुलिस का दावा है कि उन्होंने तब एफआईआर में सामूहिक बलात्कार की नई धारा जोड़ दी।

28 सितंबर 2020 को पीड़ित लड़की को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में रेफर किया गया। वहीं, एएमयू डॉक्टरों ने बाद में कहा कि उन्होंने उसे एम्स रेफर कर दिया है। इसी तारीख को चारों आरोपी अब कानून के शिकंजे में फंस चुके थे। पुलिस ने राहत की सांस ली। लेकिन इधर, दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में लड़की की हालत बहुत नाजुक थी। उसे वेंटिलेटर पर रखा गया था। 

29 सितंबर 2020 को सफदरजंग अस्पताल में पीड़ित लड़की की मौत गई। वो हमेशा के लिए खामोश हो गई। मौत उसे अपनी आगोश में लेकर हमेशा के लिए चली गई। उसका इलाज करने वाले डॉक्टरों ने कहा कि लड़की की हालत बेहद गंभीर थी। उसे बचा पाना बहुत मुश्किल था। सुबह 6 बजे उसकी सांस थम गई। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।

हाथरस की निर्भया के गुनहगार

  1. ठाकुर संदीप सिंह (22 वर्ष) ः 12वीं पास है और गांव में रहकर ही खेती का काम करता है।
  2. लवकुश सिंह (19 वर्ष)  ः 10वीं कक्षा पास है और गांव में ही रहता है। कोई काम नहीं करता।
  3. रामकुमार उर्फ रामू (28 वर्ष)  ः 12वीं पास है। दूध के एक चिलर पर काम करता है।
  4. रवि सिंह (35 वर्ष) ः 10वीं पास है। हाथरस में रहकर ही पल्लेदारी का काम करता है। 

हाथरस में चार लोगों की दरिंदगी का शिकार बनी ‘निर्भया’ ने 29 सितंबर 2020 को दम तोड़ दिया था। उसके साथ हैवानियत को इस कदर अंजाम दिया गया था कि उसकी जीभ कट गई और कमर की हड्डी तक टूट गई। पीड़िता की मौत हो जाने के बाद चारो तरफ सियासत में उबाल रहा है। वहीं, कानून व्यवस्था को लेकर योगी सरकार विपक्ष के निशाने पर है। 

30 सितंबर, 2020 की सुबह

पुलिस पर आरोप है कि पुलिस ने बिना घर वालों की मर्जी के उसका जबरजस्ती अंतिम संस्कार कर दिया। इसके पहले सफदरजंग अस्पताल में पीड़िता का पोस्टमार्टम हुआ है। जिसकी रिपोर्ट आना अभी बाकि है। हालांकि हाथरस प्रशासन ने दावा किया है कि पीड़िता की मेडिकल जांच में बलात्कार की पुष्टि नहीं है, जबकि जीभ काटने वाली बात भी नहीं दर्ज है। अब सफदरजंग अस्पताल की पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार हो रहा है। वहीं, परिवार का कहना है कि पीड़िता के गांव के उच्चजाति के चार लड़कों ने गैंगरेप किया और पुलिस ने समय पर कार्रवाई नहीं की। उन्होंने बताया कि पुलिस वे परिवार से कहा कि लड़की चोट लगने का नाटक कर रही है।

1 अक्टूबर, 2020 को 

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने हाथरस कांड को गंभीरता से लेते हुए स्वत: संज्ञान लिया। लखनऊ बेंच ने हाथरस की घटना पर संज्ञान लेते हुए 12 अक्टूबर को अपर मुख्य सचिव गृह, डीजीपी एडीजी लॉ एंड ऑर्डर, डीएम हाथरस व एसपी हाथरस को कोर्ट के समक्ष पेश होने का आदेश दिया था।

2 अक्टूबर, 2020 को 

यूपी सरकार ने एसपी विक्रांत वीर, क्षेत्राधिकारी राम शब्द, प्रभारी निरीक्षक दिनेश कुमार वर्मा, वरिष्ठ उपनिरीक्षक जगवीर सिंह, हेड मोर्हिरर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। शामली के एसपी विनीत जायसवाल को हाथरस का नया एसपी बनाया गया।

3 अक्टूबर, 2020 को 

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा समेत पांच कांग्रेसी नेता अनुमति मिलने के बाद पीड़ित परिवार से मिलने हाथरस पहुंचे। दोनों नेताओं ने यहां पीड़िता के परिवार से बंद कमरे में करीब एक घंटे तक बातचीत की। इसी दिन सीएम योगी ने मामले की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश की। इससे पहले यूपी के अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी और डीजीपी हितेश चंद्र अवस्थी ने हाथरस में पीड़ित परिवार से मुलाकात की थी।










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