- मुकदमा वापस लेने की अनशन कारियों नें उठाई मांग
- शासन प्रशासन के आंखों में धूल झोंक कर पद का दुरुपयोग करने वाली शारदा निषाद पर दर्ज हो मुकदमा-शालिनी सिंह पटेल
बाँदा। नवाबटेंक अटल सरोवर में राष्टगान मामले को लेकर समाज सेवी शालनी सिंह पटेल को धरना देने के समय अशोक लाट में 19 अगस्त को मजिस्ट्रेट के उपस्थित में पुलिस ने गिरिफ्तार करके जेल भेज दिया था। मुकदमा वापस लेने और दोषियों के खिलाफ कार्यवाही को लेकर समर्थको का तीसरे दिन अनशन जारी है। अनशनकारी समाज सेवी /पत्रकार शालिनी सिंह पटेल ने एक जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि धरना के दौरान पुलिस के अधिकारी ने कोविड-19 का आरोप लगा कर गिरिफ्तार करवा लिया और धारा 151 में शासन प्रशासन के मंशा के चलते जेल भेज दिया जब कि जमानत दार मौजूद थे। अनशन कारियों का कहना है कि दो रात बिना किसी अपराध के जेल में रख कर महिला बचाओ महिला शसक्तीकरण करण का अपमान है।
अनशनकारी शालिनी सिंह पटेल ने जारी प्रेस नोट में सूचना विभाग के अधिकारी कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाया है कहा है कि सरकार की योजनाओं की किताबों को कूड़ेदान में डाल कर जलाई जाती है। शालिनी सिंह पटेल का आरोप है कि चैनल का अधिकार पत्र जमा करने गयी तो कार्यालय में शारदा निषाद ने कह दिया कि यह हस्ताक्षर फर्जी है संपादक के हस्ताक्षर को नकारने वाला सूचना कार्यालय कैसे हो सकता है। जब रखी किताबों के बारे में जानकारी लेनी चाही तो शारदा निषाद सभी महिलाओं से कार्यालय के बाहर झगड़ा करने लगी अनशनकारी शालिनी पटेल का कहना है कि जनता के बीच बटने वाली किताबों की चोरी का आरोप लगा कर एसपी को पत्र भेजा गया।
शालिनी सिंह पटेल का आरोप है शारदा निषाद न सूचना अधिकारी है न अपर सूचना अधिकारी है फिर अपने आप को अधिकारी बता शासन प्रशासन को विगत चार साल से धोखा दे रही है जिला प्रशासन क्यों नही चार सौ बीसी का अभी तक मुकदमा दर्ज किया है। मुकदमा दर्ज कर कार्यवाही होनी चाहिए। अनशन में बैठे शालिनी सिंह पटेल के साथ के के दीक्षित, पीसी पटेल जनसेवक, राजेश राष्टवादी, श्यामबाबू त्रिपाठी, उषा निषाद, चुन्नी देवी वर्मा सहित तमाम लोगों की मांग है दर्ज मुकदमा वापस हो और दोषियों पर कार्यवाही हो।


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