अरबिंद श्रीवास्तव, ब्यूरो चीफ
प्रशासन के द्वारा 11 ओवरलोड ट्रकों पर की गई कार्यवाही से मचा हड़कंप
चिल्ला/बांदा। चिल्ला थाना क्षेत्र के चिल्ला बाई पास के पास में बीती देर रात को जिला अधिकारी के द्वारा बनाई गयी सँयुक्त टीम ने ओवरलोड बालू से भरे 11 ट्रकों पर किया कार्यवाही,ट्रक चालको में मचा हड़कम्प।जनपद में लगातार हो रहे ओवरलोड ट्रकों के द्वारा हादसे को देखते हुए जिला अधिकारी अनुराग पटेल ने जिले के अपर जिलाधिकारी उमाकांत त्रिपाठी,पैलानी तहसील की उपजिलाधिकारी सुरभि शर्मा, तहसीलदार तिमराज सिंह, खनिज अधिकारी सुभाष गुप्ता,परिवाहन विभाग एवं चिल्ला थाना के उपनिरीक्षक शमसाद अहमद तथा पुलिस टीम ने अचानक से देर रात को चेकिंग अभियान चलाया जिसमे से ट्रक चालकों में हड़कंप मच गया।अपर जिलाधिकारी उमाकांत त्रिपाठी ने बताया कि 11 ओवरलोड ट्रकों पर कार्यवाही की गई हैं।और यह अभियान लगातार चलाया जाएगा।
स्वच्छ पर्यावरण के लिए कैंसर का रोग है प्लास्टिक पदार्थ कचराः डा. हलीम खान
अतर्रा/बांदा। बांदा अतर्रा महाविद्यालय द्वारा संचालित राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई संख्या एक, दो एवं तीन के संयुक्त तत्वावधान में द्वितीय एक दिवसीय सामान्य शिविर के अन्तर्गत कस्बे गौरा बाबा धाम परिसर में पर्यावरण संरक्षण/ स्वच्छता विषयक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया, गोष्ठी को संबोधित करते हुए एन.एस.एस. इकाई संख्या 01 के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. मोहम्मद हलीम खान ने बताया कि स्वच्छ पर्यावरण के लिए किसी भी प्रकार का प्लास्टिक पदार्थ/प्लास्टिक कचरा/अपशिष्ट कैंसर के रोग के समान है, क्योंकि यह अनपघटित होने वाला पदार्थ/ नान- बायोडिग्रेडेबल पदार्थ है, इसलिए वातावरण में इसका अपघटन न होने के कारण मिट्टी में लम्बे समय तक ज्यों का त्यों विद्यमान रहता है, जो मृदा प्रदूषण का प्रमुख कारण है।
इसके कचरे को इकट्ठा करके जलाने पर उत्पन्न विभिन्न जहरीली गैसे वातावरण को प्रदूषित करती है जो सभी प्रकार के जीवित जीवों के लिए अत्यंत हानिकारक है, वर्तमान में प्लास्टिक पदार्थों के प्रयोग को सुनियोजित तरीके से प्रतिबंध लगाया जाना आवश्यक है, नही तो भविष्य में परिणाम भयावह हो सकतें हैं। इकाई संख्या 02 के कार्यक्रम अधिकारी डॉ सतीश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि प्लास्टिक की थैलियों के अत्यधिक प्रयोग एवं उसके गलत निस्तारण की वजह से बस्तियों में जगह जगह नालियां चोक हो जाने से गंदगी उत्पन्न होती है, जो बीमारी का कारण बनती है, इसलिए इनके प्रयोग से बचें। कार्यक्रम का संचालन करते हुए इकाई संख्या 03 के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. विवेक पांडेय जी ने सभी को पर्यावरण संरक्षण एवं स्वच्छता की शपथ दिलाई, तथा धन्यवाद ज्ञापन किया।
कार्यक्रम की अगली कड़ी में स्वयं सेवकों/ सेविकाओं ने कार्यक्रम अधिकारियों के निर्देशन में श्री गौरा बाबा धाम परिसर में अन्यत्र पड़े, प्लास्टिक की थैलियों, घास फूस कचरे को इकट्ठा कर, गहन रूप से झाडू लगाकर सफाई करते हुए स्वच्छता का संदेश प्रदान किया, तथा स्वच्छता संबंधी जागरूकता उत्पन्न करने के उद्देश्य से स्वच्छता जागरूकता रैली का आयोजन किया, रैली गौरा बाबा धाम परिसर से रवाना होकर प्रमुख रास्तों से होते हुए अतर्रा महाविद्यालय परिसर में समाप्त की गई। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से कुलदीप शुक्ल, प्रशान्त, राखी पटेल, आरती तिवारी, शुभम, आशीष, रूहानी, आरती गौतम, आदि सैकड़ों छात्र छात्राओं ने सक्रिय रूप से प्रतिभाग किया।
ब्लाक सभागार पर ग्राम पंचायत अध्यक्षों की विभिन्न समस्याओं को लेकर की गई बैठक
बबेरु/बांदा। बबेरू ब्लाक सभागार पर ग्राम पंचायत प्रधान संघ के अध्यक्ष के द्वारा बबेरू ब्लाक क्षेत्र के सभी ग्राम प्रधानों को बुलवाकर विभिन्न समस्याओं को लेकर बैठक संपन्न की गई। जिसमें गांव पर गौशाला गोवंश विकास कार्य सहित मनरेगा में आने वाली समस्याएं आदि के विषय में चर्चा किया। बबेरू ब्लाक कार्यालय में आज शुक्रवार को प्रधान संघ के अध्यक्ष सुरेश सिंह पटेल की मौजूदगी में ग्राम प्रधान परास राम विशुन श्रीवास की अध्यक्षता पर बैठक को संपन्न किया गया। जिसमें ब्लॉक क्षेत्र अंतर्गत आने वाली सभी गांव के ग्राम प्रधानों को बुलाया गया जिसमें, विभिन्न समस्याओं को लेकर बैठक की गई।
बैठक में गांव पर गौशाला, अन्ना जानवर, विकास कार्य, सहित मनरेगा में आने वाले समस्याएं को लेकर ग्राम प्रधान के द्वारा बैठक कर ग्राम पंचायत पर होने वाली समस्याओं को लेकर चर्चा की गई। इस मौके पर ग्राम प्रधान मरका प्रतिनिधि मुलायम सिंह यादव, कमलेश कुमार कुचेन्दू,उमरहनी प्रधान हरि कल्याण सिंह, बबेरू प्रधान प्रतिनिधि रामपाल त्यागी, पतवन ग्राम प्रधान प्रतिनिधि सुनील यादव, जितेंद्र सिंह पटेल हरदौली ग्राम प्रधान शादाब खान देवरथा ग्राम प्रधान श्री मान सिंह औगासी ग्राम प्रधान प्रतिनिधि राजेश कुमार तिवारी, सहित सभी ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधान मौजूद रहे।
प्राचीन तालाबों और कुओं में चलाएं सफाई अभियान
- भाजपा नेता ने जलशक्ति मंत्री को भेजा पत्र
बांदा। चत्रकूट धाम मंडल बांदा मुख्यालय के अंतर्गत आने वाले सभी प्राचीन तालाबों और कुआ की साफ-सफाई करा कर उनकी मरम्मत कराए जाने और तालाबों से अतिक्रमण हटाए जाने के लिए भारतीय जनता पार्टी के पूर्व जिला अध्यक्ष अशोक त्रिपाठी जीतू ने प्रदेश के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को पत्र भेजा है। पूर्व जिला अध्यक्ष ने जल शक्ति मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार को भेजें पत्र में अवगत कराया है कि बुंदेलखंड में जल का स्रोत मुख्य रूप से तालाब और कुएं ही रहे हैं ।परंतु बहुत से कुओं में गंदगी हो गई है या फिर धीमे-धीमे अपना अपना अस्ततित्व हैं खो रहे हैं।या जीर्ण शीर्ण हो गए हैं। जिस कारण बहुत से कुएं उपयोग में नहीं आ रहे हैं। कुछ लोगो ने कुआं में भी अवेध कब्जा कर रखा है।
इसी प्रकार तालाबों में लोगों के द्वारा अतिक्रमण कर लिया गया है जिससे तालाब अपना नामोनिशान मिटाने की कगार पर आ रहे । आम लोगो और गर्मियों में जीव जंतु, जानवर भी एक एक बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं।
श्री त्रिपाठी ने अपने पत्र में लिखा है कि 15 जून 2022 के पहले चित्रकूट धाम मंडल बांदा के सभी तालाबों को चिन्हित करा कर उनसे अवैध अतिक्रमण हटाया जाए। और उनकी साफ सफाई कराते हुए मरम्मत कराई जाए। इसी प्रकार सभी जल संसाधन को चिन्हित कराकर प्राचीन जल संसाधन बचाओ अभियान चलाया जाए। कुवा तालाब का जीर्णाद्धार कराया जाए। ताकि आगामी बरसात में यह सभी तालाब और कुवा लबालब हो सके।इस अभियान से बुंदेलखंड में लगातार गिर रहे जलस्तर को भी भविष्य में बचाया जा सकता है ।और लोगों को तालाबों से लाभ मिले कोई जानवर प्यास से बेहाल न रहे।
पूर्व भाजपा अध्यक्ष त्रिपाठी ने अपने पत्र में ऐसे तालाब भी बताए हैं कि जिनका सुंदरीकरण कराया जा सकता है। ये तालाब है कंधरदास का विशाल तालाब, छाबी तालाब,प्रागी तालाब जैसे विशाल तालाबों को अमृत महोत्सव में शामिल कर आजादी के अमृत सरोवर के अंतर्गत सुंदरीकरण कराकर पर्यटन के क्षेत्र मे विकसित किया जाए तो बांदा शहर के बच्चो के लिए बहुत ही सुन्दर पिकनिक स्पॉट साबित हो सकता है। पूर्व जिला अध्यक्ष अशोक त्रिपाठी अपने पत्र की एक प्रतिलिपि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी भेजते हुए निवेदन किया है कि बुंदेलखंड का लगातार जल स्तर गिर रहा है। गिर रहे जल स्तर को बचाने के लिए प्राचीन तालाब बचाओ अभियानको चलाया जाना नितांत आवश्यक है। अन्यथा भविष्य में बुंदेलखंड में पेयजल क्या भीषण संकट हो सकता है।
गर्मी के मौसम में दुधारू पशुओं की विषेष देखभाल की आवश्यकताः कृषि वैज्ञानिक
बांदा। बुन्देलखण्ड की गर्मी अप्रत्याशित रूप से बढ़ रही है। जनमानस के साथ-साथ सभी जीव जन्तु व पेड़ पौधे प्रभावित हो रहे हैं। वैश्विक तापमान में निरन्तर वृद्धि के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुयी है। वर्तमान परिस्थिति से निजात हेतु बचाव ही सर्वात्तम उपाय है। इस मौसम में जबकि तापमान में निरन्तर वृद्धि हो रही है ऐसे में पशुओं की उचित देखभाल अति आवश्यक है। गर्मी के मौसम में जब वातावरण का तापमान 42 से 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुच जाता है और गरम लू के थपेड़े चलने लगते है तो पशु दबाव की स्थिति में आ जाते हैं। इस दबाव की स्थिति का पशुओं की पाचन प्रणाली और दूध उत्पादन क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
कृषि विज्ञान केन्द्र बाँदा के पशु विज्ञान के वैज्ञानिक डा0 मानवेन्द्र सिंह ने कृषकों को सलाह दी है कि इस मौसम में पशुओं की देखभाल में अपनायी गयी थोड़ी सी भी असावधानी उनके शारीरिक वृद्धि, स्वास्थ्य, रोग प्रतिरोधी क्षमता और उत्पादन पर स्थायी कुप्रभाव डाल सकती है। गर्मी के मौसम में ध्यान न देने पर पशु के सूखा चारा खाने की मात्रा 10 से 30 और दूध उत्पादन क्षमता में 10 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। साथ ही साथ अधिक गर्मी के कारण पैदा हुये आक्सीकरण तनाव की वजह से पशुओं की बीमारियों से लड़ने की अन्दरूनी क्षमता पर बुरा असर पड़ता है और आगे आने वाले बरसात के मौसम में वे विभिन्न बीमारियों के शिकार हो जाते हैं।
डा0 सिह ने यह भी बताया कि गर्मी के बुरे असर से दुधारू पशुओं व नवजात बछड़े/बछियों की देखभाल हेतु महत्वपूर्ण उपाय किया जाना आवश्यक है। जिसमें प्रमुख रूप से सीधे तेज धूप व लू से पशुओं को बचाने हेतु पशुशाला के मुख्य द्वारा पर खस या जूट के बोरे का पर्दा लगाना चाहिये। पशु आवास के आस-पास छायादार वृ़क्षों की मौजूदगी पशुशाला के तापमान को कम रखने में सहायक होती है। पशुओं को छायादार स्थान पर बांधना चाहिये। पर्याप्त मात्रा में साफ सुथरा ताजा पीने का पानी दिन में 3 से 5 बार उपलब्ध कराना चाहिये। पशुओं से दूध निकालने के बाद यदि सम्भव हो सके तो उन्हें ठंडा पानी पिलाना चाहिये। गर्मी में भैंसों को 3 से 4 बार व गायों को कम से कम 2 बार अवश्य नहलाना चाहिये जिससे उनके शरीर का तापमान सामान्य बना रहे।
डा0 सिंह ने बताया कि पशुधन से अधिक उत्पादन लेने हेतु यह आवश्यक है कि पशुशाला के आवास की छत यदि एस्बेस्टस या कंक्रीट की है तो उसके ऊपर 4 से 6 इंच मोटी घास-फूस की तह लगा देने से पशुओं को गर्मी से काफी आराम मिलता है। पशुओं को नियमित रूप से खुरैरा करना चाहिये। खाने पीने की नॉद को नियमित अन्तराल पर चूना, कली करते रहें। पशुओं के संतुलित आहार में दाने एवं चारे का अनुपात 40 और 60 का रखना चाहिये साथ ही व्यसक पशुओं को रोजाना 40 से 60 ग्राम तथा छोटे बच्चों को 10 से 15 ग्राम नमक जरूर देना चाहिये। गर्मी के मौसम में पैदा की गयी ज्वार में जहरीला पदार्थ हो सकता है जो पशुओं ंके लिये हानिकारक होता है।
अतः इस मौसम में यदि बारिश नहीं हुयी है तो ज्वार काटने से पहले खेत में 2 से 3 बार पानी लगाने के बाद ही ज्वार की चरी खिलानी चाहिये। गर्मी के मौसम में पशुओं में गलाघोंटू, खुरपका-मुंहपका, लगड़ी बुखार आदि बीमारियों से बचाव हेतु टीकाकरण अवश्यक करायें जिससे वह आगे आने वाले बरसात के मौसम में इन बीमारियों से बचे रहें।
गर्भवती महिलाओं का पोषक आहार डकार रही आंगनवाड़ी
तिंदवार/बांदा। आंगनवाड़ी केन्द्र पूर्व माध्यमिक विद्यालय पलरा में तैनात आंगनवाड़ी माया देवी जो बच्चो का और गर्भवती महिलाओं का पोषक आहार 2 या 3 महीने में मानक के अनुसार आधा बाटती है जब हमने उनसे पूरा मांगा तो माया देवी ने कहा इतना मिलेगा जहा शिकायत करनी हो तो करो, हम लोग ये तुरंत ये बात ग्राम प्रधान रामदयाल सिंह जी को लिखित सूचना देकर के अवगत करवाई वो तुरंत ही आगनवाड़ी केंद्र जाकर के माया देवी से जानकारी ली और पूरा पोषक आहार बाटने को कहा लेकिन उनकी भी बात माया देवी नहीं मानी और कहा समूह की अध्यक्ष शिवप्यारी जब जितना देती है तब हम बाट ते है और जिस रजिस्टर पर हस्ताछर करवाकर पोषक आहार बाट ती उसमे स्वम हस्ताछर कर माया देवी पूरे महीने का पोषक आहार हजम कर लेती है, जिसमे मुकेश गुप्ता गुर्वेंद्र विश्वकर्मा संतोष पटेल चंद्रप्रकाश गुप्ता समर सिंह पुष्पेन्द्र सिंह इन्होंने तुरंत ही न्याय की मांग की ?

.jpg)

0 टिप्पणियाँ
Please don't enter any spam link in the comment Box.