जैसे तिल में तेल, चकमक में आग, दूध में घी है लेकिन सीधे नहीं दिखता ऐसे ही पूरे सन्त से युक्ति लेकर इसी शरीर में भगवान को देख सकते हैं : बाबा उमाकान्त जी

  • समर्थ सतगुरु की दया से तीसरी आंख खुलने पर स्वर्ग, बैकुंठ, देवी-देवता, हूरपरियों का दीदार इसी मनुष्य शरीर से हो सकता है
  •  इसी मनुष्य शरीर के अंदर सब कुछ है, जब सच्चे समर्थ गुरु मिल जाएं तो सब कुछ संभव है

परमात्मा के गोपनीय भेद को बताने-खोलने वाले इस अनमोल मनुष्य शरीर की असली कीमत, महत्व, उद्देश्य और उद्देश्य की प्राप्ति का तरीका बताने वाले, भौतिक और आध्यात्मिक दोनों लाभ दिलाने वाले इस समय के दुःखहर्ता समर्थ सन्त सतगुरु उज्जैन वाले बाबा उमाकान्त जी ने 12 अप्रैल 2022 को रतलाम (म.प्र.) में दिए व यूट्यूब चैनल जयगुरुदेवयूकेएम पर प्रसारित संदेश में बताया कि अब इस समय आदमी घर से बाहर निकले तो कोई गारंटी नहीं कि 2 घंटे बाद सही ठीक-ठाक घर वापस आ सके। ऐसे समय में जब समय पूरा हो जाएगा आप क्या कर पाओगे? जब तक आपका शरीर चल रहा है तब तक कुछ कर सकते हो। इसीलिए कहा गया-

करले निज काज जवानी में, इस दो दिन की जिंदगानी में

आप आज से ही अपने जीवात्मा के लिए कुछ कर लो, जन्म-मरण से छुटकारा पाने के लिए। जन्मते और मरते वक्त बड़ी तकलीफ होती है। बच्चा पैदा होते समय रोता और मरते समय हाथ-पैर पटकता है। तकलीफ़ रहती हैं तभी चिल्लाता है। नर्कों की तकलीफों को आपने देखा नहीं। इन बाहरी आंखों से देखा भी नहीं जा सकता। इन्हीं दोनों आंखों के बीच में तीसरी आंख है। वह खुल जाए तो आप बैठे-बैठे ही नरक-स्वर्ग, देवी-देवताओं को देख सकते हो, हूरपरियों का दीदार कर सकते हो, सब कुछ कर सकते हैं। कहा है-

सकल पदारथ है जग माही। कर्म हीन नर पावत नाही।।

सब कुछ है इसी शरीर में है लेकिन कर्म नहीं करोगे तो नहीं मिलेगा। कहा गया है-

यह घट भीतर सात समंदर, याही में मलमल नहाओ।
मन मोरा विदेशवा ना जाओ, घर ही है चाकरी।।

जिन्होंने इस घट में प्रभु का दर्शन किया, उन्होंने कह दिया-

ज्यों तिल माही तेल है, ज्यों चकमक में आग।
तेरा साईं तुझ में, जान सकै तो जान।।

जैसे तिल में तेल, चकमक में आग, दूध में घी होता है लेकिन दिखाई नहीं पड़ता। कब दिखाई पड़ता है जब तेल को पेरते हैं, जब राख को हटाते हैं तब आग दिखाई पड़ती है। दूध को जमा करके, हिलाकर निकले मक्खन को जब गर्म करते हैं तो घी निकलता है। यानी उपाय जब मालूम हो जाता है तब प्रभु का दर्शन इसी मनुष्य शरीर में होता है। यदि हुआ न होता तो क्यों लिखते?

सच्चे समरथ सन्त सतगुरु महात्मा किसी को धोखा नहीं देते

क्योंकि उनके लड़के बच्चे तो होते नहीं। किसके लिए धोखा देंगे? उनके नाम की जमीन जायजाद नहीं होती है। वह किसके लिए करेंगे? सन्तों के जो बच्चे होते हैं वह लोगों के ही बच्चे होते हैं। गुरु महाराज बराबर कहा करते मैंने शादी बच्चे पैदा नहीं किये। जो कुछ (साधन सुविधा) किया गुरु महाराज ने किया, आप लोगों के लिए किया। गुरु महाराज कहा करते थे आध्यात्मिक दृष्टिकोण से मैं आप सब को अपना बच्चा मानता हूं। समझो सब कुछ यही है, इस शरीर के अंदर है लेकिन जब जानकारी हो जाए, सच्चे समरथ गुरु मिल जाए, हमारे गुरु महाराज जैसे गुरु मिल जाए तब सब कुछ संभव है।

सन्त उमाकान्त जी के वचन

  • अपने वतन, अपने मालिक के पास जाने का भी काम करना चाहिए।
  • गुरु हाड़-मान्स के शरीर का नाम नहीं होता है। गुरु एक पावर है, एक शक्ति  है।
  • गुरु के बताये रास्ते पर चलने वाले की चिंता-फिक्र खत्म हो जाती है।
  • मन के कहे करो मत कोई, जो गुरु कहे करो तुम सोई।
  • सन्त के दर्शन, सतसंग व नामदान लेकर उनके बताए रास्ते पर चलने से लोक-परलोक बनता है।

(सन्त उमाकान्त जी का सतसंग प्रतिदिन प्रातः 8:40 से 9:15 तक (कुछ समय के लिए) साधना भक्ति टीवी चैनल और अधिकृत यूट्यूब चैनल जयगुरुदेवयूकेएम पर प्रसारित होता है।)

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