BANDA NEWS : कृषि विश्वविद्यालय में मशरूम व्यावसाय पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन

  • मशरूम व्यवसाय से दो से चार गुना फायदा त्वरित पाया जा सकता है।

बांदा। कृषि विश्व विद्यालय मे प्रदेश के 7 जिलों से आये 55 महिलाओं एवं युवाओं को दिया गया मशरूम उद्यम प्रशिक्षण दिया गया। मशरूम व्यवसाय से दो से चार गुना फायदा त्वरित पाया जा सकता है और इसके लिए लिए जिला, राज्य, राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय स्तरीय विभिन्न वित्तीय एजेंसियों से वित्तीय सहायता प्राप्त करना भी आसान है। मशरूम व्यसाय बहुत ही अच्छा उद्यम साबित हुआ है। कम प्रयासों से इससे ग्रामीण परिवारों को रोजगार व उनके सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए काफी आमदनी होती है। इसी क्रम में महिलाओं, बेरोजगार युवाओं, ग्रामीण लोगों एवं किसानो को मशरूम व्यवसाय के द्वारा स्वरोजगार प्रदान करने हेतु बाँदा कृषि विश्वविद्यालय में स्थापित मशरूम अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र ‘‘मशरूम उत्पादन‘‘ विषय पर पांच दिवसीय शुल्क आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन माननीय कुलपति डॉ. यु. एस. गौतम के मार्गदर्शन में दिनांक 16 अगस्त से शुरू किया गया और 20 अगस्त को सफतापूर्वक सम्पन्न हुआ। 

समापन समारोह में सभी प्रशिक्षणार्थिओं को प्रमाणपत्र और मशरूम प्रशिक्षण पुस्तिका दिया गया। प्रशिक्षण उपरान्त माननीय कुलपति महोदय ने प्रशिक्षित युवाओं को उज्जवल भविस्य के लिए शुभकामनाएं दी और कहा कि सभी लोग अपने क्षेत्र में मशरूम उद्यम शुरू करें और अगर भविष्य में इसमें कोई भी तकनीकी समस्या आएगी तो उसके निराकरण में विश्वविद्यालय यथासंभव सहयोग करेगा। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के सयोंजक और पादप रोग विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र कुमार सिंह ने बताया की इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य बुंदेलखंड व प्रदेश के अन्य क्षेत्रों के बेरोजगार युवाओं को मशरूम उद्यमी बनाना है जो भारत सरकार की संकल्पना किसानो की दोगुनी आय व आत्म निर्भर भारत को सफल बनाने में मदद करेगा। 

यह पांच दिवसीय प्रायोगिक प्रशिक्षण कार्यक्रम विश्वविद्यालय के मशरूम यूनिट के प्रभारी व इस कार्यक्रम के आयोजन सचिव डॉ. दुर्गा प्रसाद के देखरेख में सफलतापूर्वक आयोजित हुआ। डॉ. प्रसाद ने बताया की इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के 7 जिलों बाँदा, हमीरपुर, महोबा, चित्रकूट, अयोध्या, प्रयागराज और मिर्जापुर से आये 55 प्रतिभागिओं को मशरूम व्यवसाय से सम्बंधित समस्त पहलुओं जैसे उत्पादन प्रक्षेत्र की संरचना, संवर्धन एवं संरक्षण, स्पान उत्पादन तकनीक, प्रमुख खाद्य व औषधीय मशरुम की उत्पादन तकनीक, मशरूम के प्रमुख रोग, कीट एवं विकार के लक्षण एवं रोकथाम, विभिन्न व्यंजन, प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन व विपणन इत्यादि पर इससे सम्बंधित 10 वैज्ञानिकों व विशेषज्ञों के द्वारा लगभग 20 से ज्यादा सम्बंधित भिन्न भिन्न टॉपिक पर वृहद् ढंग से प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया गया। 

इस पांच दिवसीय प्रशिक्षण उपरांत प्रशिक्षणार्थी मशरूम को एक उद्यम के रूप में शुरू कर सकें इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर सफल उद्यमिओं का ऑनलाइन व्याख्यान भी कराया गया। इस क्रम में श्रीमती नम्रता यदु, निदेशक छत्तीसगढ़ मशरूम फार्म, रायपुर  एवं श्री स्वतंत्र सिंह, मशरूम उद्यमी देओरिया, उत्तर प्रदेश ने मशरूम उधम पर प्रशिक्षणार्थिओं को वर्चुअल माध्यम से सम्बोधित किया। कार्यक्रम के समापन अवसर पर ये भी बताया गया कि विश्वविद्यालय की मशरूम यूनिट महिलाओं व युवाओं को मशरूम व्यवसाय के क्षेत्र में उद्यमी बनाने हेतु इससे सम्बंधित प्रशिक्षण कार्यक्रम अक्टूबर व नवम्बर में भी आयोजित करेगा।


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