नहीं होगी आक्सीजन की कमी, युवा उद्यमियों ने उठाया बीडा

  • आक्सीजन की कमी से हुयी मौतों ने युवा उद्यमियों को दिखाया रास्ता
  • प्लांट लगने के बाद अस्पतालों के साथ औद्योगिक इकाईयों को भी नहीं होगी आक्सीजन की कमी

अरविन्द श्रीवास्तव, ब्यूरो चीफ 

बांदा। कोरोना महामारी के दूसरे चरण के दौरान उत्पन्न हुयी आक्सीजन की समस्या से देश में लाखों लोगों की जानें चली गयी। वहीं जनपद में भी आक्सीजन की कमी के चलते कई लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पडा। लेकिन अब जनपद में आक्सीजन की कोई कमी नहीं हो पायेगी। सरकारी मशीनरी के साथ साथ जनपद के दो युवा उद्यमियों ने भी आक्सीजन की कमी को दूर करने का बीडा उठाया है। युवा उद्यमियों के द्वारा जनपद में आक्सीजन मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित किया जा रहा है। जिसके उपयोग चिकित्सीय उपयोग के साथ साथ औद्योगिकी के क्षेत्र में किया जायेगा। 

जनपद में जल्द ही आक्सीजन मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित होगा। इसकी स्थापना के लिए दो युवा उद्यमियों ने बीडा उठाया है। लेवरेंस ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर रोहित जैन तथा सीए आलोक जैन ने इसकी स्थापना के पीछे की जानकारी देते हुए बताया कि कोरोना महामारी के दूसरे चरण के दौरान देश के ज्यादातर अस्पतालों में आक्सीजन की कमी का सामना बीमारों को करना पडा। आक्सीजन की कमी के चलते देश में कोरोना की चपेट में आये लाखों लोगों की जानें चली गयी। जनपद में भी कमोवेश यहीं हाल रहा। 

रोहित जैन कहते है कि अपनों को आक्सीजन की कमी के कारण दम तोडते देखा बहुत ही निराशाजनक रहा। कहा कि यह मंजर देखने के बाद मन में जनपद में भी आक्सीजन प्लांट की स्थापना का संकल्प लिया। अपने परिजनों तथा मित्रों से जब इस संदर्भ में बात की तो उन्होंने भी हौसला बढाया। रोहित कहते है कि दृढ निश्चय के साथ जिलाधिकारी व उद्योग विभाग के साथ वार्ता की गयी। जिस पर जिलाधिकारी आनंद सिंह ने भी उनके जज्बे को सराहा। कहते है कि जिलाधिकारी की प्रेरणा तथा उद्योग विभाग के संपूर्ण समर्थन से कंपनी ने आक्सीजन प्लांट पर काम शुरू किया। 

गुजरात की एक कंपनी को प्लांट बनाने का आर्डर दिया गया। जिसके कुछ पार्ट्स जर्मनी से बनकर आयेंगे। उन्होंने बताया कि भूरागढ औद्योगिक क्षेत्र में आक्सीजन प्लांट के लिए जमीन का आवंटन हो चुका है। साथ ही निर्माण कार्य भी शुरू हो चुका है। इस प्रोजेक्ट में लगभग ढाई करोड से अधिक का खर्च आने की संभावना है। जिसको इंडियन बैंक द्वारा फाइनेंस किया जा रहा है। आक्सीजन प्लांट के विषय में जानकारी देते हुए रोहित व आलोक ने बताया कि प्लांट की क्षमता 100 मी क्यूब प्रति घंटा होगी, जिससे 500 जंबो सिलेंडर प्रतिदिन भरे जा सकते है। 

प्लांट के लिए आयी चुनौतियों के विषय में बताते हुए आलोक जैन ने बताया कि प्लांट के लिए 210 केवीए के बिजली कनेक्शन की आवश्यकता है। परंतु बिजली विभाग के पास इतना बडा कनेक्शन देने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर एवं ट्रांसफार्मर की कमी है। जिसके लिए उच्चाधिकारियों से बात चल रही है। कंपनी के डायरेक्टरों द्वारा बिजली विभाग से निवदेन किया गया है कि इंडस्ट्रियल एरिया में विभाग अपना इंफ्रास्ट्रक्चर बढायें, जिससे भविष्य में बुंदेलखंड क्षेत्र में इंडस्ट्रीज को बढावा मिल सके। कंपनी के दोनों डायरेक्टरों रोहित जैन तथा सीए आलोक जैन ने उम्मीद जताई कि आगामी नवंबर माह तक प्लांट में आक्सीजन का प्रोडक्शन प्रारंभ हो जायेगा। जिसके बाद जनपद के साथ साथ पूरे बुंदेलखंड में आक्सीजन की कमी से लोगों को जूझना नहीं पडेगा।

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