प्राकृतिक खेती की नई शुरुआत कृषि विज्ञान केन्द्र सोहना में


                                                 

सिद्धार्थनगर, उत्तरप्रदेश। जनपद सिद्धार्थनगर के कृषि विज्ञान केंद्र सोहना में "जीवामृत" बनाकर प्राकृतिक खेती की शुरुआत की गई। गाय के गोबर और गोमूत्र से बनने वाला यह जीवामृत पोषक तत्वों से भरपूर और जैविक कीटनाशक के रूप में प्रयोग किया जाता है। बताया जाता है कि इस नई शुरुआत से अब बिना किसी रासायनिक खाद के और बिना किसी रासायनिक दवाओं की पोषक तत्वों से भरपूर फसलों एवं सब्जियों का उत्पादन किया जा सकता है। 

वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ एल सी वर्मा ने बनाने की विधि की जानकारी देते हुए बताया कि सबसे पहले गाय के मूत्र 5 लीटर को एक कंटेनर में रखें तथा इसमें गाय का गोबर 10 किलोग्राम मिला दें। गोबर को मूत्र में इस तरह से मिलायें की मूत्र के साथ घुल जाय किसी भी तरह का कोई गाँठ नहीं रहे। इसके बाद 500 ग्राम गुड, 500 ग्राम बेसन, एक किलोग्राम बरगद के वृक्ष के नीचे की मिट्टी को बर्तन में पानी के साथ घोल लें। (गुड का प्रयोग इस लिए करते हैं की तैयार मिश्रण में उपस्थित बैक्ट्रिया ज्यादा एक्टिव हो जाता है)। 



गुड को भी इस तरह घोले की गुड घुल जाए। अब घुले हुये गुड को गोबर युक्त मूत्र में मिला दें। इन दोनों मिश्रण को अच्छी तरह से चलायें। कुछ देर तक मिश्रण को लकड़ी से चलाते रहें। जब मिश्रण अच्छी तरह से मिल जाए तो एक बड़े से कंटेनर में डाल दें और कुछ देर तक एक लकड़ी से चलते रहें। इसके बाद उसमें उतना ही पानी मिला दें। 

इसी तरह सभी मिश्रण को सात दिन तक छोड़ दें लेकिन सातों दिनों तक समय-समय पर उस मिश्रण के एक लकड़ी से चलाते रहें। तत्पश्चात इस मिश्रण का उपयोग पौधों पर कर सकते हैं क्योंकि यह कीटनाशक मिश्रण पौधों पर के फंगी को समाप्त कर देता है। इस तरह से किसान भाई अपनें अपने खेती का लागत कम कर सकते हैं। 

आज के इस जैविक खेती कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिक डॉ डीपी सिंह, डॉ मार्कंडेय सिंह, मौसम विशेषज्ञ सूर्य प्रकाश सिंह,  मौसम पर्यवेक्षक अर्जुन सिंह यादव, काला नमक धान के वैज्ञानिक प्रेमचंद्र चौरसिया आदि उपस्थित रहे।


 (सिद्धार्थनगर से संवाददाता राजेश शास्त्री की रिपोर्ट)

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