राजेश शास्त्री, संवाददाता
सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थनगर जनपद में बाढ़ से ग्रस्त जिले के सभी क्षेत्रों के किसानों की पूरी फसल बर्बाद हो चुकी है। बांध की मरम्मत न होने के कारण पानी लोगों के घरों में घुसा है। जिसके कारण चूल्हा तक नहीं जल पा रहा है। किसानों को टाफी, बिस्कुट, चना, लाई, भूजा देने से राहत नहीं मिलेगा। किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से फसल की पूरी लागत दी जाए।
उक्त बातें पूर्व विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय ने बुधवार को बांसी रोड स्थित सपा कार्यालय पर पत्रकारवार्ता के दौरान कही है। उन्होंने बताया कि मैं ने गत 22 अगस्त 2021 से क्षेत्र के बाढ़ से घिरे विभिन्न गांवों का भ्रमण करके बाढ़ से पीड़ित लोगों का हालचाल जाना और मैंने देखा कि कई गांव बाढ़ के पानी से घिरे हैं। दर्जनों गांवों में बाढ़ का पानी लोगों के घरों में घुस गया है। जहां लोग चूल्हा तक नहीं जला पा रहे है। खाने तक के लाले पडे हैं।
उन्होंने आरोप लगाते हुए बताया कि प्रशासन के लोग अपनी नाकामी को छिपाने के लिए बाढ़ प्रभावित गांव में विपक्षी पार्टियों के लोगों को जाने तक नहीं दे रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि डुमरियागंज के तहसीलदार ने राजनीतिक दबाव में नाविक को मना कर दिया है कि किसी अन्य राजनीतिक पार्टी के लोगों को बाढ़ क्षेत्र का भ्रमण नाव से न करने दें। बाढ़ क्षेत्र में यहां एक मोटर बोट नाव लगाई गई है। इस बात का पता तब चला कि जब हम लोग एक गांव में जाना चाह रहे थे तो नाविक ने साफ मना कर दिया कि हम नहीं ले जा सकते हैं।
कारण पूछने पर उसने बताया कि साहब का आदेश है। मैं सरकार से यह मांग करता हूँ कि किसानों की बर्बाद हुई फसल को प्रधानमंत्री फसल बीमा सुरक्षा योजना से किसानों के फसल की भरपूर लागत वापस दी जाए। वहीं गांव के लोगों का कहना था कि इस नाव पर सिर्फ भाजपा सरकार के नेता, कार्यकर्ता ही बैठ कर घूम सकते हैं।
उन्होंने आगे बताया कि भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर पहुंच चुका है। गत 26 दिसंबर 2020 से 23 मई 2021 तक के बीच प्रशासक के रूप में नियुक्त ग्राम सचिवों ने गांव में बिना काम किए हुए कई करोड़ रुपए खुनियांव और इटवा ब्लाक में डकार लिया है। जिसकी मैं जांच करवा रहा हूँ। जहां भी काम नहीं हुआ है इसकी जांच करके संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और सरकारी धन की रिकवरी की जाए।
शाहपुर-भोजपुर बांध बनना था उस पर कुछ काम भी हुआ था। लेकिन कालांतर में सरकार बदलने के कारण इसका काम ठप हो गया। अगर यह बांध बन जाता तो किसानों की फसल जलमग्न न होती और लोगों के घरों में बाढ़ का पानी न घुसता। इसी प्रकार परसोहन बांध पर भी इंजीनियरों ने मनरेगा योजना के तहत मजदूरों की मजदूरी दिखा कर पैसा निकाल लिया और कुछ भी काम नहीं हुआ है।
उन्होंने आगे कहा कि राजनीतिक संरक्षण में लोग छोटे-छोटे काम कर रहे हैं। अगर सरकार चाहती तो बंधा बना देती जिससे लोगों के फसल जलमग्न न होती। मुख्य मार्गों को छोड़कर गांव के संपर्क मार्ग की हालत क्षेत्र में बहुत ही खराब है। शाहपुर-सिंगार जोत तो एक उदाहरण है। इसी के साथ गांव को जोड़ने वाली, गांव के अंदर जाने वाली सड़कों की स्थिति इतना जर्जर है कि खाना खाकर चलने पर भोजन मुंह से बाहर निकल सकता है। बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं।
लेकिन भाजपा सरकार सिर्फ वादों की और जुमलों की ठेका लेकर बैठी है। लोगों को जुमले दे रही है। शून्य से शिखर भी एक जुमला ही निकला। पांच साल में इटवा विधानसभा यदि शून्य से शिखर पर पहुंचा होता हो किसानों की फसल न डूबती न लोगों के घरों में पानी घुसता। सपा सरकार में किए गए काम और लगाए गए पत्थरों को भाजपा सरकार के लोग पत्थर बदलकर उसे अपना काम बता रहे हैं। यहां सिर्फ पत्थर बदलने का काम किया जा रहा है।
इस सरकार ने अपने शासनकाल में कोई भी सड़क नहीं बनवाया। मैं मांग करता हूं कि सरकार सड़कों की मरम्मत न करे बल्कि इनका पुनर्निर्माण करे। रिपेयरिंग से काम चलने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि आगामी सितंबर माह में विद्यालय खुलेंगे उससे पहले जिन विद्यालयों में पानी भरा है वहां साफ सफाई करके बच्चों को पढ़ने के लिए बुलाया जाए।
इस अवसर पर के0 के0 चौधरी, अब्दुल लतीफ, बबलू खान, पिंटू शाह, संदीप द्विवेदी, अमित दूबे, राम चन्द्र पाठक, अम्बरीष दूबे, वेद प्रकाश मिश्रा, अनूप सिंह, विजय गौड़, पप्पू उपाध्याय, अक्षय अग्रहरि, राजकुमार मिश्रा, शैलेन्द्र शुक्ला आदि लोग उपस्थित रहे।



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