राजेश शास्त्री, संवाददाता
जनपद सिद्धार्थनगर के विभिन्न क्षेत्रों लगातार हो रही बारिश से इटवा नगर पंचायत अंतर्गत पेड़ारी स्थित गौशाला अब तलैया में बदल चुका है। क्योंकि पेड़ारी गौशाला के गेट के सामने लगभग 5 फिट पानी भरा हुआ है। मिली जानकारी के मुताबिक़ कई गायें इस गौशाला से निकल कर सडकों पर घूम रही हैं। जिससे आवागमन भी बाधित हो रहा है जिससे आए दिन सड़कों पर दुर्घटनाएं भी घट रही हैं। लगभग 136 से 150 क्षमता वाले इस गौशाला में बीते 19 अगस्त को कुल 60 गायें थीं। जिसमें पांच गाय बीमार थीं। चार गायें मर चुकी थीं जिसमें तीन को गौशाला के अन्दर गड्ढ़ा खोद कर पाट दिया गया था। और एक को गड्ढ़ा खोद कर पाटने के लिए पॉलीथीन से ढ़क कर रखा गया था।
मरी हुई गायों को तुरंत मिट्टी में दबाने के लिए, जिससे लोगों की नजरें न पडे जेसीबी लायी गयी। लेकिन गौशाला के गेट पर पानी भरा होने के नाते जेसीबी को अन्दर जाने का रास्ता नहीं था। इस लिए गेट पर दो ट्राली रोड़ा डालकर रास्ता बनाया। पानी में घुस कर जेसीबी अन्दर गयी और अपना काम करके वापस आयी। उसके बाद इसी रोडे पर दो ह्यूम पाइप रख दिया गया जिससे गौशाला के अन्दर अब जेसीबी भी नहीं आ जा सकती है। गौशाला के चारों तरफ खाई खोदी गयी है। सामने जो गेट लगाया गया है वहां भी लगभग 5 फीट पानी भरा हुआ है। जिससे अन्दर की गाय न बाहर निकल सकती हैं न बाहर की अंदर जा सकती हैं। क्योंकि इधर बर्षा से अब पानी अधिक भर गया है। जिससे कमर भर पानी में घुस कर गायों को चारा देने वाले अन्दर जाते आते हैं। उसके बाद सापों को गौशाला के एक छोर से दूसरे छोर तक तैरते देखा गया।
गुरूवार को टीन शेड में लगभग 14 गाय तथा गौशाला भवन में 12 गाय मौजूद थीं। कुछ गाय गौशाला के दक्षिण स्थित मुख्य सडक पर पश्चिम किनारे बैठी थी। अन्य गायों का पता नहीं है। आस पास के लोगों का कहना था कि ह्यूम पाइप को ऊपर ही रख दिया गया है। अगर इसे मिट्टी खोदकर रखा गया होता और गेट के अन्दर तक मिट्टी पाटा गया होता तो रास्ता आने जाने लायक हो जाता है। गौशाला की यह गायें अक्सर सडकों पर बैठी मिल जाती हैं। बडे वाहनों से यह चोटिल हो जाती हैं। दो पहिया वाहन व पैदल वाले इनसे चोटिल होते हैं। जानकारों का कहना है कि रिकार्ड में दर्ज गायों की संख्या के अनुसार ही उनकों चारा का पैसा आता है। लेकिन वर्तमान में गौशाला में गायें कम हैं। संख्या के अपेक्षा खर्च कम होता है। ऐसे में जो बचत होता है वह पैसा कहां जाता है जो जॉंच का विषय बनता है।


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