अधिकारियों के अनुसार संत ज्ञानेश्वर महाराज पालकी मार्ग के दिवेघाट से लेकर मोहोल तक के लगभग 221 किलोमीटर लंबे खंड और संत तुकाराम महाराज पालकी मार्ग के पतस से लेकर टोंदले-बोंदले तक के लगभग 130 किलोमीटर लंबे खंड को चार लेन का बनाया जायेगा। चार लेन वाले इन खंडों के दोनों ओर ‘पालकी’ के लिए समर्पित पैदल मार्ग बनाए जायेंगे। इन चार लेन और समर्पित पैदल मार्गों की अनुमानित लागत क्रमशः 6690 करोड़ रुपये और लगभग 4400 करोड़ रुपये से अधिक होगी।
भगवान विष्णु और माँ लक्ष्मी के स्वरूप विठ्ठल देव और माँ रुक्मिणी की पवित्र भूमि के रूप में पूजित पंढरपुर तक आवागमन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्गों पर 223 किलोमीटर से अधिक लंबी पूर्ण निर्मित एवं उन्नत सड़क परियोजनाएं को इस अवसर पर प्रधानमंत्री राष्ट्र को समर्पित किया। इन सड़क परियोजनाओं की अनुमानित लागत 1180 करोड़ रुपये से अधिक है। इन परियोजनाओं में म्हसवड-पिलीव-पंढरपुर (NH 548E), कुर्दुवाड़ी-पंढरपुर (NH 965C), पंढरपुर-संगोला (NH 965C), NH 561A का तेम्भुरनी-पंढरपुर खंड और NH 561A के पंढरपुर-मंगलवेढा-उमाडी खंड शामिल हैं। कार्यक्रम में केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, महाराष्ट्र के राज्यपाल भगतसिंह खोसियारी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भी भाग लिया।
इस अवसर पर मोदी ने कहा कि दो दिन पहले मुझे केदारनाथ में आदि शंकराचार्य जी की पुनर्निर्मित समाधि की सेवा का अवसर मिला और आज भगवान विट्ठल ने अपने नित्य निवास स्थान पंढरपुर में मुझे आप सबके बीच जोड़ दिया। इससे ज्यादा आनंद का ईश्वरीय कृपा के साक्षात्कार का सौभाग्य और क्या हो सकता है। उन्होंने कहा कि वह भविष्य में पंढरपुर को भारत के सबसे स्वच्छ तीर्थ स्थलों में देखना चाहते हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यह काम भी जनभागीदारी से ही होगा, जब स्थानीय लोग स्वच्छता के आंदोलन का नेतृत्व अपनी कमान में लेंगे, तभी हम इस सपने को साकार कर पाएंगे।
पीएम मोदी ने कहा कि वारकरी आंदोलन की और एक विशेषता यह है- पुरुषों के कदम से कदम मिलाकर वारी -(यात्रा) में चलने वाली हमारी बहनें, देश की स्त्री शक्ति हैं। पंढरी की वारी, अवसरों की समानता का प्रतीक है इसमें किसी के साथ किसी तरह का भेदभाव नहीं है। भारत की संस्कृति को, भारत के आदर्शों को सदियों से यहाँ का धरती पुत्र ही जीवित बनाए हुये है। उन्होंने इस अवसर पर लोगों से तीन आशीर्वाद मांगते हुए संतों के नाम पर विकसित किए जा रहे पालकी मार्गों के दोनों और छायादार वृक्षों की पौध लगाने, प्याऊ बनाने और पंढरपुर को स्वच्छ रखने में सहयोग की मांग की। उन्होंने कहा-यह आशीर्वाद पंढरपुर के लिए है।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र में भक्ति आंदोलन 'पंढरपुर के मुख्य देवता विठोवा या विट्टल' के मंदिर चारों ओर केद्रित था। यह आंदोलन पंठरपुर आंदोलन के रूप में प्रसिद्ध हुआ। इस आंदोलन मुख्य रूप से दो संप्रदायों में विभक्त था – पहला, वारकरी संप्रदाय और दूसरा धरकारी संप्रदाय। वारकरी संप्रदाय रहस्यवादी संप्रदाय था। प्रसिद्ध संत निवृत्तिनाथ तथा ज्ञानेश्वर इस संप्रदाय के संस्थापक थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि पंढरपुर की सेवा मेरे लिए साक्षात् श्री नारायण हरि की सेवा है। यह वह भूमि है, जहां भक्तों के लिए भगवान आज भी प्रत्यक्ष विराजते हैं। यह वह भूमि है, जिसके बारे में संत नामदेव जी महाराज ने कहा है कि पंढरपुर तबसे है जब संसार की भी सृष्टि नहीं हुई थी।
प्रधानमंत्री ने कहा भारत भूमि की ये विशेषता है कि समय-समय पर, अलग-अलग क्षेत्रों में, ऐसी महान विभूतियां अवतरित होती रहीं, देश को दिशा दिखाती रहीं। उन्होंने इस अवसर पर दक्षिण में हुए माधवाचार्य, निम्बार्काचार्य, वल्लभचार्य, रामानुजाचार्य ,पश्चिम में नरसी मेहता, मीराबाई, धीरो भगत, भोजा भगत और प्रीतम, उत्तर में रामानंद, कबीरदास, गोस्वामी तुलसीदास, सूरदास, गुरु नानकदेव, संत रैदास जी और पूर्व में हुए संत चैतन्य महाप्रभु, और शंकर देव का उल्लेख किया। उन्होंने यह भी कहा कि इन संतों के विचारों ने देश को समृद्ध किया है। (वार्ता)

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