हमारा क्या कसूर, बालू से है मजबूर

 

  • कई प्रान्तों में काम कर रहे खबरी हो रहें है वापस

बाँदा। बुंदेलखंड के हमीरपुर, महोबा और बाँदा में लाल सोना बालू की खुदाई का बड़ा व्यापार होता है बालू माफियाओं का दलाल खबरी लाल को दो घिसा मोबाइल से खुराफात को रोकने के लिए एक हजार से पांच हजार तक देता है। इस तरह से खबरी लाल को दस से बीस हजार तक मिल जाते है। जानकर बताते है कि जो तेजी से दो घिसा में पोस्ट कर लोगों और अधिकारियों के बीच बालू माफियाओं को बदनाम करते है उन्हें तीस से पैतीस हजार तक मिल जाते है। इस तरह 6 से 7 महीनों तक खबरी लाल की एस से जिंदगी काटती है।

सूत्र बताते है कि मई माह से सिताम्बर तक खबरी लालो के पास कोई काम न रहने से अदर प्रान्तों में काम करने के लिए रवाना हो जाते है। रेलवे सूत्रों के अनुसार गुजरात प्रान्त के सूरत अहदाबाद, वापी महाराष्ट के कई जिलों से खबरी लालों की रिजर्वेशन की होड़ लगी है कई खबरची अपना परिचय कार्ड देकर पूरा माजरा बताते है कि बालू माफिया उत्तर प्रदेश में खबरी लाल खबरची से काफी डरते हैं जितना यहां कपड़े जूतों आदि के काम करने में महीने की पगार मिलती उससे दुगनी बालू माफिया एक पोस्ट करने में देने लगते है।



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