फातिमा इंटर कॉलेज में एनसीसी का प्रशिक्षण हुआ प्रारम्भ

राजेश शास्त्री ब्यूरो चीफ

सिद्धार्थनगर। जनपद सिद्धार्थनगर के इटवा तहसील क्षेत्र अन्तर्गत फातिमा इंटर कॉलेज सेमरी में छा दिवसीय नेशनल कैडेट कोर एनसीसी का प्रशिक्षण कार्यक्रम बुधवार को प्रारम्भ हुआ। जानकारी के अनुसार फातिमा इंटर कॉलेज सेमरी के छात्र छात्राओं का छा दिवसीय नेशनल कैडेट कोर एनसीसी जूनिर डिविजन प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारम्भ बुधवार को हुआ। प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण सूबेदार रमेश प्रधान पी०आई॰ स्टाफ 46 बटालियन गोरखपुर और उनके सहयोगी ए०न०ओ० स्टाफ जुबैर अहमद फातिमा इंटर कॉलेज सेमरी के द्वारा प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

प्रशिक्षण सूबेदार रमेश प्रधान ने कहा कि एनसीसी अनुशासन और देशभक्ति की भावना को जागृत करता है। प्रशिक्षुओं को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत करता है। देश के प्रति समर्पण की भावना पैदा करता है। नौजवानों में चरित्र निर्माण, नेतृत्व करने, अनुशासन में रहने, धर्मनिरपेक्षता, रोमांच और निस्वार्थ सेवाभाव का संचार करता है। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में नेतृत्व प्रदान करना और देश की सेवा के लिए सदैव तैयार रहना सिखाता है। 

एनसीसी में तीन प्रकार के प्रमाणपत्र मिलते हैं। ए, बी और सी। एनसीसी प्रमाणपत्र धारक को अंकों में छूट मिलती है। जूनियर डिवीजन में विद्यालय के छात्रों को लिया जाता है। जो छात्र छात्राएं कक्षा 9 और 10 में हैं। वह जूनियर डिवीजन ज्वाइन कर सकते हैं। जूनियर डिवीजन ज्वाइन करने के लिए छात्र छात्राओं की उम्र सीमा 12 वर्ष से लेकर साढे 18.5 वर्ष तक होनी चाहिए। जूनियर डिवीजन का समय अवधि 2 साल का होता है। इस डिवीजन में छात्र छात्राओं को 2 साल तक प्रशिक्षण दी जाती है। एनसीसी में शामिल होने के लिए छात्र-छात्राओं को किसी भी स्कूल या एजुकेशनल इंस्टीट्यूट में प्रवेश लेना होता है। छात्र का चरित्र अच्छा होना चाहिए। 

उसे भारत का नागरिक होना चाहिए। स्वास्थ्य पूर्ण रूप से स्वस्थ होना चाहिए। जूनियर विंग में आवेदन करने के छात्र छात्राओं की आयु सीमा 12 वर्ष से 15 वर्ष के बीच होनी चाहिए। न्यूनतम शारीरिक मापदंड कद पुरुष का 157.5 सेंटीमीटर और वजन इसी के अनुपात में होना चाहिए। कद महिला 152 सेंटीमीटर तथा वजन 42 किलोग्राम शारीरिक और मानसिक रूप से पूर्ण रूप से स्वस्थ होना चाहिए। इस अवसर पर फातिमा इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य ने उपस्थित प्रशिक्षुओं संदीप पाल, मुस्कान जहां आदि में फल का वितरण किया और उनका उत्साहवर्धन किया।

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