- जीव हत्या का पाप इस समय पर 16 में से 14 आना पूरे विश्व के लोगों ऊपर लग चुका है
- औरु करै अपराधु कोउ, और पाव फल भोगु।
उज्जैन (मध्य प्रदेश)। कर्मों के गहन विधान के अनुसार जान-अनजान में अकारण ही लगने वाले पापों से, बनने वाली गलतियों से चेताने वाले और उनसे बचने का उपाय बताने वाले इस समय के पूरे महापुरुष उज्जैन वाले सन्त बाबा उमाकान्त जी महाराज ने 17 जनवरी 2022 को दिए व यूट्यूब चैनल जयगुरुदेवयूकेएम पर लाइव प्रसारित सतसंग में बताया कि जीव हत्या बहुत बड़ा पाप है। जीव हत्या का पाप पूरे विश्व में इस समय पर 16 आना में 14 आना लोगों को लग चुका है, यानी 80 प्रतिशत लोगों को ये पाप लग चुका है।
बहुत से ऐसे पाप हैं जिनका पता भी नहीं रहता कि यह पाप है और यह हमको लग जाएगा। हर कोई पापी नहीं है। कहा गया-
और कोई करें अपराध और पाव फल भोग।अति विचित्र भगवन्त गति जान न जाने जोग।।
हर कोई पापी नहीं होता है लेकिन सजा वह भी पा जाता है क्योंकि कहीं न कहीं से दूसरे के पाप कर्म आ जाते हैं। बहुत से पाप कर्म ऐसे हैं कि पता भी नहीं रहता कि यह पाप है और यह आपको लग जाएगा।
शराब और मांस की वजह से मानवता खत्म और राक्षसी प्रवर्ति आ जाती हैं, इनमें इन्वॉल्व नही होना चाहिये
जड़ क्या है? यही जीव हत्या, जीव हत्या का पाप, बुद्धि भ्रष्ट होना है। बुद्धि क्यों भ्रष्ट होती है? ज्ञान क्यों खत्म होता है? मानवता क्यों खत्म होती है? पशुता भी नहीं रह जाती है। पशुओं का भी कोई सिद्धांत, खानपान विहार-आहार होता है, वह भी नहीं रह जाता है, राक्षसी प्रवत्ति आ जाती है। पागल जैसे कोई हो जाता है। पागलपन मे आदमी को कुछ नहीं पता चलता। न पशु का व्यवहार पता चलता है न आदमी का व्यवहार करना जान पाता है। अलग व्यवहार, विचित्र गति उसकी हो जाती है। यह सब किस से होता है? मांस, शराब, नशे की गोलियां खाने-पीने की वजह से होता है, बुद्धि भ्रष्ट होती है इसलिए इससे दूर रहना और इसमें इनवाल्व नहीं होना चाहिए।
मांस मछली अंडा शराब जब पेट में जाता है तो इनसे बने खून की वजह से तरह-तरह की बीमारियां पैदा हो जाती है
अभी तक आपसे गलती बन गई, मांस मछली अंडा खाया आपने। जिस में भी जीव हत्या होती है वह पाप लगता है। यह गंदी चीज है। जब पेट में जाती हैं, उसका असर खून में, आता है। बीमारियां बढ़ती हैं। बुद्धि के ऊपर असर पड़ता है तो बुद्धि भ्रष्ट होती है, ज्ञान खत्म होता है। अभी तक जो गलती बन गई, अब मत करना। मांस मछली अंडा या शराब जैसा तेज नशा- कोई भी खाने-पीने वाला हो, गोली हो कोई उसका सेवन मत करना। बाकी हजम कर सको तो सौ गिलास दूध पी लो, हमारी तरफ से पूरी छूट है। आपके पास है तो अच्छा खाओ, अच्छे घर में रहो, हमारी तरफ से कोई दिक्कत नहीं है।
आप किसी भी जाति-धर्म के हो, अमीर-गरीब, अनपढ़-पढ़े लिखे, हमको परहेज नहीं, हमको तो आपकी जीवात्मा से प्रेम है
हमको तो आपके शरीर से और शरीर को चलाने वाली जीवात्मा से प्रेम है। इसलिए शरीर आप स्वस्थ रहें, संयम-नियम का पालन करो। शरीर आपका स्वस्थ रहे, हम यह चाहते हैं।
हम चाहते हैं कि आपकी आत्मा अपने वतन घर मालिक के पास पहुंच जाए, नर्कों चौरासी की यात्रा, जन्म-मरण की पीड़ा न सहना पड़े
हम यह चाहते हैं कि आपका शरीर रहते-रहते आपकी आत्मा अपने वतन, अपने घर अपने मालिक के पास पहुंच जाए। यह नर्क-चौरासी में न जाए। यह नर्कों की यात्रा से बच जाए। यह मां के पेट में नौ महीने लटकने से बच जाए। यह जन्म-मरण की पीड़ा, शरीर धारण करते समय और छोड़ते समय जो तकलीफ होती है, उस तकलीफ से यह बच जाए।

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