- वो मालिक खुद बेताब है आपको उसके लोक का देश का जलवा दिखाने के लिए
- प्रभु बराबर आवाज लगा रहा है कि शब्द की डोर पकड़ करके तुम मेरे पास आ जाओ
अज्ञानता और मन की कमजोरी की वजह से प्रभु के निरंतर बुलावे को इग्नोर करते मानव को तरह-तरह से बता समझा कर मन में प्रभु के प्रति प्रेम जगाने वाले, प्रभु से जीते जी मिलने का रास्ता नामदान बता कर, उस रास्ते पर चला कर प्रभु की गोद में बैठा देने वाले, सभी तरह के कष्टों को हर लेने वाले, इस समय धरती पर मनुष्य शरीर में आये स्वयं प्रभु, मौजूदा वक़्त के महापुरुष सन्त सतगुरु दुःखहर्ता त्रिकालदर्शी परम दयालु उज्जैन वाले बाबा उमाकान्त जी महाराज ने 7 अगस्त 2022 सायंकालीन बेला में बावल आश्रम, रेवाड़ी (हरियाणा) में दिए व अधिकृत यूट्यूब चैनल जयगुरुदेवयूकेएम पर प्रसारित संदेश में बताया कि वह तरीका मालूम हो जाए कि इसी मनुष्य शरीर के अंदर ही वह प्रभु है। इसी में वह आवाज, बांग लगा रहा है कि आ जाओ, इधर आ जाओ।
जीवात्मा को उधर बुला रहा है लेकिन यह समझ में नहीं आता है। उस प्रभु को पाने के लिए आवाज, बांग लगाते हैं, कीर्तन प्रार्थना करते हैं, भगवान के बनाए हुए मंदिर नहीं जाकर के आदमी के बनाए हुए मंदिर में जाते हैं, मूर्तियों के सामने आवाज लगाते हैं, दया कृपा करो प्रभु मेरी तरफ देखो, यह सब करते हैं। इसकी कोई जरूरत रह जाएगी जब अंदर से आवाज लगाना मालूम हो जाएगा? वो तो रास्ता दिखा ही रहा है पुकार रहा है, आ जाओ आ जाओ यह रास्ता है, यह शब्द की डोर मैंने लटका दी है। शब्द की डोर को पकड़ करके तुम मेरे पास आ जाओ तब कोई भटकाव नहीं रह जाएगा। सन्तों ने बहुत तरीकों से समझाया। कबीर साहब ने कहा-
कंकड़ पत्थर जोड़कर मस्जिद लई बनाय। ता पर मुल्ला बांग दे क्या बहरा हुआ खुदाय।।
उन्होंने कहा कंकर पत्थर जोड़ करके खड़े होकर के क्यों उसको आवाज लगाते अजान देते पुकारते हो? क्या वह खुदा बहरा है? दुनिया बनाने वाला कहां से बहरा हो जाएगा? जिनकी आवाज आप नहीं सुन पाते हो, उनकी, सबकी आवाज वो सुनता है, वह बहरा कैसे हो जाएगा।
इश्क का जोके नजारा मुफ्त में बदनाम है। हुस्न खुद बेताब है जलवा दिखाने के लिए।।
जब प्रेम हो जाता है किससे? प्रभु से, गुरु से। हुस्न का मतलब सुंदरता होती है। एक तो बाहर की सुंदरता और एक अंदर की सुंदरता होती है। तो अंदर में सुंदर तो वह है ही। उस प्रभु के सुंदरता के जितना सुंदर तो कोई है ही नहीं इस दुनिया संसार में। लेकिन यह बाहर की भी सुंदरता होती है।
हुस्न किसको कहते है?
सुंदर चीज को, सुंदरता को। तो जोक ने कहा कि हुस्न का जोके नजारा, अगर उस प्रभु से प्रेम हो गया तो उसके पास जब पहुंच जाओगे फिर उसका नजारा देखने को मिलता है क्योंकि वह बुलाता है। वह तो वहां का जलवा दिखाने के लिए, कहां का? अपने देश का, अपने लोक का, वह खुद बेताब है।
जीव इंद्रियों के सुख धन-संपत्ति के मोह में इतना फंसा है कि सुनते जानते हुए भी भूला है
लेकिन जीव सुनता नहीं है। उधर ध्यान नहीं जाता है। कुछ न जानकारी में ऐसा होता है और कुछ जानकारी होते हुए भी मन इंद्रियों के भोग में, सुख में, धन-संपत्ति के मोह में इतना फंसा रहता है की सुनते और जानते हुए भी भूल जाता है। उसको अवॉयड बहिष्कृत कर देता है, ध्यान नहीं देता है।
हमेशा प्रभु किसी न किसी को धरती पर भेजा करते हैं
लेकिन चूंकि प्रभु किसी न किसी को चेताने बताने के लिए हमेशा भेजा करता है। वह जो पूरे गुरु सन्त के रूप में धरती पर आए, जिनका नाम इस तरह का लोगों ने रखा वो बराबर लोगों को बुलाते, उनके पास जाते, मजमा लगाते, याद दिलाते रहते हैं। कहा है- अतिशय रगड करै जो कोई। अनल प्रगट चंदन से होई।।
चंदन शीतल होता है वह भी रगड़ने से गर्म हो जाता है, उसमें से आग निकल आती है। ऐसे ही सुनते-सुनते सुनाते-सुनाते रगड़ते-रगड़ते उसमें भी एक तरह से मालिक से मिलने की प्रेम की ज्वाला जल जाती है, प्रभु से प्रेम करने लगता है फिर उसको पाने की इच्छा करने लगता है। जब रास्ता मिल जाता है तब उस रास्ते पर चलकर के प्रभु के पास पहुंच जाता है, उनकी गोद में बैठ जाता है। तो जिन प्रेमियों को रास्ता नामदान मिल गया वो उस रास्ते पर चलो और जीते जी प्रभु को प्राप्त कर लो।


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