बीएचयू में देश के शीर्ष विद्वानों का महासम्मान, राज्यपाल ने सराहा काशी का विद्या वैभव



वाराणसी (काशी)। उत्तर प्रदेश नागकूप शास्त्रार्थ समिति और काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) के वैदिक विज्ञान केन्द्र के संयुक्त तत्वावधान में आज काशी की पावन धरा पर एक ऐतिहासिक सांस्कृतिक और शैक्षणिक महासमागम संपन्न हुआ। महर्षि पतंजलि की जन्म जयंती के पावन उपलक्ष्य में आयोजित इस विशिष्ट विद्वत्सम्मान समारोह में देश के कोने-कोने से जुटे संत-मनीषियों और शीर्ष शिक्षाविदों ने हिस्सा लिया। मूसलाधार बारिश के बावजूद पूरा सभागार संस्कृतानुरागियों से खचाखच भरा रहा और सैकड़ों लोग खड़े होकर इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने, जो काशी के विद्या वैभव के प्रति जन-जन के अगाध प्रेम को दर्शाता है।
कार्यक्रम का गौरवमयी शुभारंभ राष्ट्रगीत 'वन्दे मातरम' के सामूहिक गान और प्रो. पतंजलि मिश्र द्वारा प्रस्तुत ओजस्वी वैदिक मंगलाचरण से हुआ। इसके बाद मंच पर आसीन विशिष्ट अतिथियों ने महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर एवं दीप प्रज्ज्वलित कर सत्र की विधिवत शुरुआत की।

राज्यपाल शिवप्रताप शुक्ल के हाथों सम्मानित हुए राष्ट्र के 14 शीर्ष आचार्य और 50 युवा शास्त्रार्थी

समारोह के मुख्य अतिथि तेलंगाना के माननीय राज्यपाल शिवप्रताप शुक्ल ने नागकुआं पर आयोजित ऐतिहासिक शास्त्रार्थ प्रतियोगिता के 50 विजयी छात्र-प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र देकर उनका हौसला बढ़ाया। इसके बाद, भारतीय वांग्मय और पारंपरिक शास्त्रों के संरक्षण में अपना संपूर्ण जीवन होम करने वाले देश के विभिन्न राज्यों (केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, दिल्ली, मध्य प्रदेश, बिहार व उत्तर प्रदेश) के 14 महाविद्वानों का महासम्मान किया गया। प्रत्येक विशिष्ट आचार्य को अंगवस्त्र, रुद्राक्ष की माला, प्रशस्ति पत्र और ₹51,000 (प्रो. रामचंद्र पांडेय को ₹1,00,000) की सम्मान राशि का चेक प्रदान किया गया।

काशी के सिद्ध संतों और महान आचार्यों के नाम पर समर्पित रहे ये विशिष्ट अलंकरण

समारोह में देश के जिन 14 शीर्ष आचार्यों को उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए सम्मानित किया गया, उनकी गौरवशाली सूची इस प्रकार है:

  1. प्रो. ललितकुमार त्रिपाठी (निदेशक, केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, प्रयागराज) – आचार्य रामप्रसाद त्रिपाठी सम्मान (₹51,000)
  2. प्रो. किशोरचन्द्र पाढ़ी (पूर्व अध्यक्ष, व्याकरण, श्रीजगन्नाथ संस्कृत वि.वि., उड़ीसा) – आचार्य रामयत्न शुक्ल सम्मान (₹51,000)
  3. प्रो. रामपूजन पाण्डेय (पूर्व संकायप्रमुख, सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय) – आचार्य वशिष्ठ त्रिपाठी सम्मान (₹51,000)
  4. प्रो. रामचंद्र पाण्डेय (पूर्व संकायप्रमुख, सं.वि.ध.वि. संकाय, BHU) – आचार्य राजमोहन उपाध्याय सम्मान (₹1,00,000)
  5. प्रो. ओमनाथ बिमली (पूर्व अध्यक्ष, संस्कृत विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय) – आचार्य गजाननशास्त्री मुसलगांवकर सम्मान (₹51,000)
  6. प्रो. हरिदत्त शर्मा (पूर्व विभागाध्यक्ष, संस्कृत, इलाहाबाद विश्वविद्यालय) – आचार्य रेवाप्रसाद द्विवेदी सम्मान (₹51,000)
  7. प्रो. सुधाकर मिश्र (संकायप्रमुख, दर्शन संकाय, सम्पूर्णानन्द संस्कृत वि.वि.) – स्वामीश्री ब्रह्मानन्द सरस्वती सम्मान (₹51,000)
  8. प्रो. दिनेश कुमार गर्ग (संकायप्रमुख, साहित्यसंस्कृति, सम्पूर्णानन्द संस्कृत वि.वि.) – आचार्य प्रभुनाथ द्विवेदी सम्मान (₹51,000)
  9. डॉ. वी. श्रीराम घनपाठी (वेद भवन, हैदराबाद, तेलंगाना) – स्वामी मलई बी. कृष्णमूर्ति घनपाठी सम्मान (₹51,000)
  10. प्रो. कमलेश झा (पूर्व संकायप्रमुख, सं.वि.ध.वि. संकाय, BHU) – जगद्गुरु विष्णुस्वामी यमुनाचार्य सतुआबाबा सम्मान (₹51,000)
  11. डॉ. आचार्य पी.के. माधवन (श्रीशंकराचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय, केरल) – अन्नपूर्णाश्री सम्मान (₹51,000)
  12. प्रो. हरिनारायण तिवारी (पूर्व अध्यक्ष, व्याकरण, के.सं.वि., लखनऊ परिसर) – ब्रह्मचारी शंकरदेव चैतन्य सम्मान (₹51,000)
  13. डॉ. दिव्यचेतन ब्रह्मचारी (आचार्य, व्याकरण, सम्पूर्णानन्द संस्कृत वि.वि.) – आचार्य बनमालीमिश्र सम्मान (₹51,000)

नागकूप ही है व्याकरण महाग्रंथ ‘महाभाष्य’ की जन्मस्थली, यहीं से शुरू हुआ अमर इतिहास

श्रीकाशीविद्वत्परिषद् के महामंत्री एवं कार्यक्रम के मुख्य संयोजक प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने उत्तर प्रदेश नागकूप शास्त्रार्थ समिति की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए एक बड़ी ऐतिहासिक बात कही। उन्होंने बताया कि व्याकरण शास्त्र के सबसे महान ग्रंथ 'महाभाष्य' की रचना महर्षि पतंजलि द्वारा वाराणसी के इसी ऐतिहासिक नागकूप स्थल पर की गई थी। तभी से आरंभ हुई यह शास्त्रार्थ परंपरा आज सदियों बाद भी काशी के गुरुकुलों, घाटों और गलियों में हर महीने पूरी जीवंतता के साथ गूंज रही है। समिति के अध्यक्ष प्रो. सदाशिव कुमार द्विवेदी ने अपने स्वागत भाषण में आए हुए सभी अतिथियों का काशी की परंपरा के अनुसार सत्कार किया।

बीएचयू के कुलपति ने किया बड़ा एलान, शास्त्रार्थ को वैश्विक मंच देने के लिए बनेगी विशेष योजना

समारोह की अध्यक्षता कर रहे काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी काशी के इस अप्रतिम विद्या वैभव को देखकर गदगद हो उठे। उन्होंने मंच से बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि नागकूप शास्त्रार्थ समिति की इस महान विरासत को पूरी दुनिया के सामने एक मिसाल के रूप में पेश करने के लिए बीएचयू का संस्कृतविद्या धर्मविज्ञान (SVDV) संकाय और संस्कृत विभाग एक विस्तृत वैश्विक कार्ययोजना तैयार करेगा, जिसे विश्वविद्यालय प्रशासन अपना पूरा सहयोग देगा। वहीं, शहर दक्षिणी के विधायक डॉ. नीलकण्ठ तिवारी ने कहा कि काशी ज्ञान की वो सर्वोच्च कसौटी है जहाँ स्वयं आद्य शंकराचार्य और भगवान बुद्ध जैसे युगपुरुषों को भी अपनी प्रामाणिकता के लिए शास्त्रार्थ करना पड़ा था।

संतों के आशीष और प्रधानमंत्री के विजन से पुनर्जीवित हो रहा है काशी का अध्यात्म वैभव

अपने अध्यक्षीय व मुख्य संबोधन में माननीय राज्यपाल शिवप्रताप शुक्ल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार काशी विश्वनाथ धाम, यहाँ के दिव्य घाटों और आधुनिक शिक्षण संस्थानों का कायाकल्प हुआ है, उसी तरह अब काशी के इस विशाल पारंपरिक शास्त्रार्थ ज्ञान को भी वैश्विक स्तर पर स्थापित करने का समय आ गया है। उन्होंने पूर्ण विश्वास जताया कि आज का युवा ही कल की सनातन शास्त्रार्थ परंपरा का सबसे मजबूत रक्षक बनेगा।इस महाआयोजन के मंच पर जगद्गुरु सतुआ बाबा संतोषाचार्य (महामंत्री, अखिल भारतीय संतसमिति), स्वामी जितेन्द्रानन्द सरस्वती, धर्मसंघपीठाधीश्वर शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी और पद्मभूषण प्रो. वशिष्ठ त्रिपाठी जैसे पूज्य संतों की दिव्य उपस्थिति रही। कार्यक्रम के अंत में वैदिक विज्ञान केन्द्र के प्रो. विनय कुमार पाण्डेय ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया और राष्ट्रगान की सामूहिक धुन के साथ इस अविस्मरणीय उत्सव का समापन हुआ।


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