पेरोल से संबंधित आंकड़ों की आयु-वार विश्लेषण से यह पता चलता है कि अगस्त, 2021 के दौरान 22-25 वर्ष के आयु वर्ग के 4.03 लाख युवाओं ने ईपीएफओ से जुड़कर सबसे अधिक नामांकन दर्ज कराया है। इसके बाद लगभग 3.25 लाख कुल नामांकन के साथ 18-21 वर्ष के आयु वर्ग के युवाओं का स्थान है। यह इंगित करता है कि पहली बार नौकरीपेशा बने युवा बड़ी संख्या में संगठित क्षेत्र की श्रमशक्ति में शामिल हो रहे हैं और अगस्त, 2021 में नए जुड़ने वाले कुल ग्राहकों में इनका योगदान लगभग 49.18 प्रतिशत का है। पेरोल के आंकड़ों का राज्य-वार विश्लेषण इस तथ्य को रेखांकित करता है कि ईपीएफओ के दायरे में शामिल महाराष्ट्र, हरियाणा, गुजरात, तमिलनाडु और कर्नाटक के प्रतिष्ठान अगस्त महीने के दौरान लगभग 8.95 लाख ग्राहकों को जोड़कर सबसे आगे हैं, जो कि पेरोल में सभी आयु वर्ग से आने वाले कुल जुड़ाव का लगभग 60.45 प्रतिशत है।
लैंगिक आधार पर किया गया विश्लेषण यह इंगित करता है कि अगस्त महीने के दौरान कुल ग्राहक जुड़ाव में महिलाओं द्वारा कराए गए नामांकन का हिस्सा लगभग 20 प्रतिशत का है। पिछले जुलाई, 2021 के महीने की तुलना में अगस्त, 2021 के दौरान महिला ग्राहकों की कुल संख्या में लगभग 10.18 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। ऐसा मुख्य रूप से अगस्त महीने के दौरान कम संख्या में महिला सदस्यों के बाहर निकलने के कारण हुआ है। पेरोल का उद्योग-वार आंकड़ा यह इंगित करता है कि अगस्त महीने के दौरान कुल ग्राहकों के जुड़ाव में 'विशेषज्ञ सेवाएं' श्रेणी (श्रमशक्ति उपलब्ध कराने वाली एजेंसियों, निजी सुरक्षा एजेंसियों और छोटे ठेकेदारों आदि को मिलाकर) का योगदान 39.91 प्रतिशत का है। इसके अलावा, व्यापारिक-वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों, इंजीनियरिंग उत्पादों, भवन एवं निर्माण, कपड़ा, परिधान निर्माण, अस्पतालों और वित्तपोषण से जुड़े प्रतिष्ठानों जैसे उद्योगों से संबंधित पेरोल में कुल जुड़ाव के आंकड़ों में वृद्धि का रूझान देखा गया है।
पेरोल से संबंधित यह आंकड़ा अनंतिम है क्योंकि आंकड़ों का एकत्रीकरण एक निरंतर चलने वाला अभियान है और कर्मचारियों से संबंधित रिकॉर्ड का अद्यतन किया जाना एक सतत प्रक्रिया है। इसलिए पिछले आंकड़ों को हर महीने अद्यतन किया जाता है। मई, 2018 से ईपीएफओ सितंबर 2017 से आगे की अवधि को कवर करते हुए पेरोल से संबंधित आंकड़ों को जारी करता आ रहा है। ईपीएफओ देश का एक प्रमुख संगठन है, जिसपर ईपीएफ और एमपी अधिनियम, 1952 के विधान के तहत शामिल संगठित / अर्ध-संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ प्रदान करने की जिम्मेदारी है। यह सदस्यों को उनकी सेवानिवृत्ति पर भविष्य निधि एवं पेंशन संबंधी लाभ तथा किसी सदस्य की असामयिक मृत्यु होने पर उनके परिवारों को पारिवारिक पेंशन और बीमा संबंधी लाभ प्रदान करता है।

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