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कोलकाता बंदरगाह पर एक कंटेनर की तलाशी के दौरान यह भी जानकारी मिली कि इस लदान के बिल में माल को मात्र 3.8 लाख रुपये मूल्य के 'एचडीएमआई केबल' के रूप में घोषित किया है, जबकि माल की जांच करने पर यह खुलासा हुआ कि लैपटॉप, मोबाइल फोन आदि जैसी उच्च मूल्य की आयातित वस्तुओं की कीमत 64 करोड़ रुपए के करीब है। तलाशी के दौरान मिले और जब्त किए गए सबूतों से पता चलता है कि विदेशी मालवाहकों को ऐसे कम चालान वाले सामानों का भुगतान हवाला चैनलों के माध्यम से किया गया है। लगभग पूरा कारोबार इसी तरह की अवैध कार्यप्रणाली में संलिप्त है।
हालांकि पिछले 3 वर्षों में ऐसी शेल संस्थाओं द्वारा बंदरगाहों पर घोषित आयातित माल का मूल्य लगभग 20 करोड़ रुपए हैं जबकि अनुमान के मुताबिक बड़े पैमाने पर अंडर-वैल्यूएशन की जानकारी मिलने के बाद, इस अवधि के दौरान आयातित माल का वास्तविक मूल्य 2000 करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है। इस प्रकार धोखाधड़ी के माध्यम से इस संपत्ति का उपयोग उच्च मूल्य की अचल संपत्तियों के अधिग्रहण के लिए किया गया है, इसके अलावा फर्जी किराये और असुरक्षित ऋण के रूप में दिखाई गई नकदी की आय को विदेशी बैंक खातों में जमा किया गया है। तलाशी के दौरान 2.75 करोड़ रुपये की बेहिसाबी नकदी को भी जब्त किया गया है। आगे की जांच जारी है।

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