भारत और अमेरिका के बीच घनिष्ठ साझीदारी एक मुक्त, खुले, समावेशी और समृद्ध भारत-प्रशांत क्षेत्र का केंद्रीय तत्व है : पीयूष गोयल

पीयूष गोयल

नई दिल्ली/पीआईवी। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग तथा उपभोक्ता मामले, खाद्य तथा सार्वजनिक वितरण मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच घनिष्ठ साझीदारी एक मुक्त, खुले, समावेशी और समृद्ध भारत-प्रशांत क्षेत्र का केंद्रीय तत्व है। वह यूनाईटेड स्टेट्स-इंडिया बिजनेस काउंसिल की 46वीं वार्षिक आम बैठक तथा ‘सुधार से पुनरोत्थान: उभरते स्वास्थ्य देखभाल मुद्दों तथा प्रौद्योगिकीय रुझानों के बीच वैश्विक आर्थिक सुधार के बढ़ते महत्व की झलक' विषय वस्तु पर आधारित इंडिया आइडियाज सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को एक समुचित रूप से निर्वाचित सार्वजनिक सेवा के प्रमुख के रूप में निर्बाधित रूप से 20 वर्ष पूरे करने पर बधाई देते हुए गोयल ने उनके अनथक प्रयासों की सराहना की जिसने भारत को राष्ट्रों के समूह में एक विशिष्ट दर्जा प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि विश्व भारत को अब एक भरोसेमंद और विश्वसनीय साझीदार तथा विश्व अर्थव्यवस्था में एक प्रेरक शक्ति के रूप में देखता है। भारत-अमेरिका संबंधों में ‘एकजुटता, शक्ति, समावेशन, निर्भीकता तथा प्रतिबद्धता‘ लाने के लिए यूएसआईबीसी की सराहना करते हुए, उन्होंने पिछले 46 वर्षों से एक मजबूत भारत-अमेरिका व्यवसाय संबंधों के निर्माण के लिए एक सेतु के रूप में काम करने के उसके प्रयासों की प्रशंसा की।

उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका संबंध हमारे द्विपक्षीय, क्षेत्रीय तथा वैश्विक मुद्वों के समन्वयन के आधार पर एक वैश्विक रणनीतिक साझीदारी में विकसित हो चुके है और प्रधानमंत्री श्री मोदी तथा अमेरिका के राष्ट्रपति श्री बाइडेन हमारे संबंधों में और अधिक गहराई लाने में बहुत सक्रिय रहे हैं। क्वाड लीडर्स सम्मेलन के लिए पिछले महीने प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका यात्रा का उल्लेख करते हुए, उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के बीच पहली व्यक्तिगत मुलाकात बहुत ही फलदायी रही थी। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी ने रेखांकित किया कि आपूर्ति श्रृंखलाएं केवल लागत पर नहीं बल्कि भरोसे पर भी आधारित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत ऐसे क्षेत्रों पर फोकस करना चाहता है जहां वह प्रतिस्पर्धात्मक रूप से लाभ की स्थिति में है जिससे कि वह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बड़ा हितधारक बन सके। कोविड के बाद की दुनिया में विश्वास में कमी आने के मामलों में हो रही वृद्धि पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका संबंधों को लचीला बनाने की अपील की। यह देखते हुए कि भारत को अमेरिका का एक प्रमुख रक्षा साझीदार माना जाता है, गोयल ने हमारे व्यवसायिक संबंधों में सुधार लाने तथा दोनों देशों के नागरिकों को बेहतर सेवाएं और अवसर उपलब्ध कराने के लिए ऊर्जा, स्वास्थ्य, व्यापार और नवोन्मेषण के क्षेत्रों में विविध प्रकार के संवादों की अपील की।

उन्होंने कहा कि भारत वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया, यूएई, ईयू तथा ब्रिटेन जैसे समान विचारधारा वाले देशों के साथ एफटीए पर बातचीत कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत 24 सेक्टरों पर ध्यान केंद्रित करता रहा है जहां उसे तुलनात्मक तथा प्रतिस्पर्धी तरीके से बढ़त हासिल है। एक राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन के निर्माण की चर्चा करते हुए, उन्होंने कहा कि भारत निवेश को बढ़ावा देने, अपनी कर व्यवस्था को सरल बनाने, अपनी एफटीआई नीति को उदार बनाने के लिए काम कर रहा है तथा अन्वेषण, नवोन्मेषण, अनुसंधान एवं विकास को प्रोत्साहित करने का प्रयास कर रहा है। इस बात पर जोर देते हुए कि अब विश्व भारत को अपने खुलेपन, अवसरों तथा विकास के लिए देख रहा है, उन्होंने कहा कि भारत के पास अब दुनिया में तीसरी सबसे बड़ी स्टार्टअप इको प्रणाली है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आज भारत ‘आत्म निर्भर भारत‘ की राह पर अग्रसर है जो एक ऐसा मंत्र है जो भारत को ताकतपूर्ण स्थिति के साथ दुनिया के देशों के साथ काम करने के लिए और अधिक खुला तथा अधिकारसंपन्न बनाएगा।  

यह देखते हुए कि भारत ने  ‘मेक इन इंडिया‘ से ‘मेक इन इंडिया फ़ॉर द वर्ल्ड ‘ तक की ऊंची छलांग लगाई है, गोयल ने कहा कि भारत अपने घरलू उद्योग को सुदृढ़ बना रहा है और लागत-प्रतिस्पर्धात्मकता के साथ गुणवत्ता प्रस्तुत करेगा। गोयल ने कहा कि महामारी से लेकर जलवायु परिवर्तन तक कई मुद्वों पर ध्यान देने तक, भारत-अमेरिका साझीदारी को नेतृत्व की भूमिका का निर्वाह करना है। उन्होंने कहा कि ‘ भारत और अमेरिका को प्रौद्योगिकी, वित्त, उत्पादन तथा आपूर्ति में हमारी पूरक शक्तियों का लाभ उठाने तथा इलेक्ट्रोनिक मैन्यूफैक्चरिंग, फिनटेक, एड-टेक, फार्मा और स्वास्थ्य, जैवप्रौद्योगिकी, आदि में सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता है। अमेरिका का एक स्वाभाविक सहयोगी बताते हुए, उन्होंने कहा कि एक साझा विजन के साथ, दोनों देश अपने नागरिकों की प्रगति और समृद्धि में सच्चे साझीदार बन सकते हैं।    

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