बिना शिक्षा मित्र के चल रहा विद्यालय, बच्चों को नही पता अपने अध्यापकों का नाम

बच्चों को नही पता अपने अध्यापकों का नाम

शिवम सिंह, संवाददाता

जसपुरा/बांदा। देश व प्रदेश की सरकारें शिक्षा के क्षेत्र में करोड़ों रुपए पानी की तरह फूक रही हैं। विशेष कर ग्रामीण इलाकों के उन गरीब बच्चों के लिए जो पढ़ कर आगे कुछ करना चाहते हैं लेकिन जिम्मेदारों ने सरकार की इस मंशा को फेल करने का बीड़ा उठा रखा है। हम बात कर रहे हैं जनपद के पैलानी तहसील के सबसे सुदूरवर्ती इलाके के सबादा ग्राम पंचायत के दीनदयाल के डेरा में स्थित प्राथमिक विद्यालय का हैं। जहाँ पर ग्राम प्रधान के चहेते शिक्षा मित्र की कारगुजारी विद्यालय के बच्चों, प्रबंध समिति के अध्यक्ष राजकरन व अन्य ग्रामीण श्यामलाल बख्ल पृथ्वीपाल, रमेश, बबली आदि ने बताई।

सभी ने एक स्वर में बताया कि विद्यालय में तैनात शिक्षा मित्र जो कि पूर्व व वर्तमान ग्राम प्रधान का चहेता हैं जो बड़ी ही दबंगई के साथ मानदेय लेने कें लिया एक माह में चंद दिन ही विद्यालय जाता है। यदि कोई ग्रामीण कहता है तो कहता है कि जितना पैसा मिलता है उतना ही काम किया जाता है। उस शिक्षा मित्र को न तो डर हैं किसी भी अधिकारी का क्योंकि उसको भी पता है कि इस सुदूरवर्ती इलाके में कोई नही आएगा। ग्रामीणों से जानकारी मिली तो आज सोमवार को मीडिया की टीम ने जाकर देखा तो ग्रामीणों ने जो बताया था वह सही था। विद्यालय के प्रधान अध्यापक सुनील कुमार मौजूद 37 बच्चों को पढ़ा रहे थे।

उन्होंने बताया कि विद्यालय में तीन लोगों का स्टाप हैं जिसमे से सहायक अध्यापक अजय कुमार की ड्यूटी बडागांव में वेक्सिनेशन में लगी हुई हैं। तथा शिक्षा मित्र जुबैर अहमद छुटी में गए हुए हैं। विद्यालय के बच्चों ने जब पूछा गया तो वे विद्यालय के अध्यापको के नाम सही से नही बता पाए। बच्चों को ग्राम प्रधान, देश के प्रधानमंत्री का नाम तथा कई बच्चे यह भी नही बता पाए की वे किस कक्षा में पढ़ते हैं। विद्यालय में कुल 47 बच्चों का नामाकंन हैं। मिड डे मील में आज रोटी सब्जी बनी हुई थी। तथा मौसमी फल का वितरण किया गया था।

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