संगठन की सभी इकाइयों के भंग होने की सूचना भ्रामक - सिद्धार्थ

  • विश्व भोजपुरी सम्मेलन के अंतरराष्ट्रीय महासचिव की नियुक्ति अवैध
  • साहित्यकार अरुणेश नीरन के देहांत के बाद उत्पन्न हुई संस्थागत समस्या
  • तथ्यों को छिपाकर पाकेट की संस्था बनाने के प्रयास में लगे हैं कई लोग 

देवरिया। प्रदेश अध्यक्ष डा. सिद्धार्थ मणि त्रिपाठी ने गुरुवार को प्रेस वार्ता में कहा कि दुनिया भर में भोजपुरी भाषा, संस्कृति और परंपरा को लेकर आंदोलन करने वाली संस्था विश्व भोजपुरी सम्मेलन के संबंध में एक व्यक्ति द्वारा फ़र्ज़ी सूचना देकर भ्रम फैलाया जा रहा है। जिसके ख़िलाफ़ राष्ट्रीय कमेटी ने संगठन के पदाधिकारियों तथा राज्य कमेटियों को सक्रिय रहने का निर्देश दिया है। श्रद्धेय स्व. परमहंस त्रिपाठी जी एवं पूज्यवर गुरुदेव स्व. अरुणेश नीरन जी के प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष आशीर्वाद की साक्षी यह संस्था देश और विदेश में भोजपुरी की अति विशिष्ट सेवा के लिए मशहूर रही है। वर्तमान में पूर्व वरिष्ठ आईएएस (महाराष्ट्र शासन) श्री सतीश त्रिपाठी संस्था के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। 

जिस प्रकार एक गलत सूचना मीडिया में देकर सुधाकर तिवारी ने संगठन में विघटन और गोलबंदी करने का प्रयास किया है हम उसकी निंदा करते हैं। दिनांक 13-04-2026 को देवरिया के विभोस  के सचिवालय पर बैठक हुई जिसका एजेंडा भिन्न था। संस्था के नियमों के मुताबिक़ किसी भी इकाई को भंग करने के नियम होते हैं। इन्हें अनदेखा करते हुए पूर्वाग्रह से ग्रस्त होकर मनमाने तरीक़े से सुधाकर तिवारी ने मीडिया में बयान जारी कर दिया। 

नीरन जी के देहांत के बाद रिक्त हुए अंतरराष्ट्रीय महासचिव के पद पर हुई सुधाकर तिवारी की नियुक्ति (13-09-2025) पूरी तरह असंवैधानिक और अवैधानिक रूप से की गई। इस कार्यवाही/नियुक्ति के दौरान संगठन के अंतरराष्ट्रीय फोरम के मुखिया तथा राष्ट्रीय अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और महामंत्री में से कोई भी पदाधिकारी न तो उपस्थित रहा और ना ही आजीवन सदस्यों की मौजूदगी रही। 

कार्यालय सचिव श्री जगदीश उपाध्याय जी द्वारा लिखी गई कार्यवाही दस्तावेज में सुधाकर तिवारी को तदर्थ महासचिव यह कहते हुए नियुक्त किया गया था कि चूँकि नीरन जी के देहांत के बाद काग़ज़ी कोरम पूरा करने के लिए तथा अगली उपयुक्त नियुक्ति होने तक के लिए इन्हें (सुधाकर तिवारी) जोड़ा जा रहा है। 

सुधाकर तिवारी राष्ट्रीय कार्यकारिणी के पदाधिकारियों से अपरिचित हैं। कार्यकारिणी के लोगों से इनका कोई परिचय नहीं है। लिहाज़ा इनके द्वारा 13-04-2025 को फेसबुक पर जारी किये गये प्रेस नोट का कोई औचित्य नहीं है। जिसकी नियुक्ति ही अवैध हो उसके द्वारा जारी किसी भी प्रकार के पत्र की कोई मान्यता नहीं है। अलबत्ता इस पत्र से यह साफ ज़ाहिर होता है कि सुधाकर तिवारी जैसे लोग निरंकुश हैं जिन पर संस्था के शीर्षस्थ लोगों का नियंत्रण नहीं है। 

जिन लोगों ने जीवन भर विभोस के क्रियाकलाप और नीरन जी को लेकर सवाल खड़े किये वो लोग बैठक में बुलाये गये? नेपाल और देश के अन्य हिस्सों से लोगों को बुलाया गया और देवरिया में निवासरत सदस्यों और पदाधिकारियों को सूचना तक नहीं दी गई? श्री मणि ने कहा कि, सुधाकर तिवारी की तदर्थ नियुक्ति के समय न तो राष्ट्रीय कमेटी के पदाधिकारी मौजूद थे और ना ही अंतरराष्ट्रीय कमेटी के अध्यक्ष। आजीवन सदस्यों को भी इनकी नियुक्ति के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई। 

संस्था के खाते में दो बड़े आयोजन

6 अप्रैल 2025 को दिल्ली में विभोस की राष्ट्रीय इकाई द्वारा राष्ट्रीय अधिवेशन आयोजित किया गया जिसमें संस्था के संस्थापकों में से वरिष्ठतम पदाधिकारी डा. अरुणेश नीरन जी मौजूद थे। नीरन जी द्वारा ग्यारह राज्यों के अध्यक्ष और महामंत्री के नामों की घोषणा की गई। साथ ही राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप श्री अजीत दुबे जी और उनकी कार्यकारिणी को अगले तीन वर्ष तक के लिए दायित्व सौंपा गया। 

उत्तर प्रदेश इकाई का अध्यक्ष नियुक्त होने के बाद मेरे द्वारा देवरिया में दिसंबर 2025 में विभोस का दो दिवसीय प्रांतीय अधिवेशन आयोजित किया गया। जिसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अजीत दुबे जी, दिल्ली प्रांत के अध्यक्ष विनय मणि त्रिपाठी, राष्ट्रीय समन्वयक अपूर्व नारायण तिवारी जी, झारखंड से अजय ओझा जी समेत अन्य कई प्रांतों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। नीरन जी के लोगों को संस्था से किनारे करने की इस मुहिम को अंजाम देने वाले अवैध पदाधिकारी के विरुद्ध संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा कार्रवाई की जाएगी।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ